अरावली पहाड़ियाँ (AravalliHill Ranges) | अरावली पर्वतमाला के बारे में विस्तार से जानकारी

अरावली पहाड़ियाँ (AravalliHill Ranges)-
➡️ अरावली श्रेणी राजस्थान को मुख्य एवं विशिष्ट पर्वत श्रेणी है।
➡️ ये विश्व के प्राचीनतम वलित पर्वतों में से एक है तथा हिमालय पर्वतों एवं विन्ध्यांचल की पहाड़ियों के बीच सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी है।
➡️यह पर्वत श्रेणियाँ केलिडोनियन पर्वत निर्माण काल की हैं,जिनका निर्माण पेलियोजोइक कल्प में सिल्युरियन शक के
उत्तर एवं डेवोनियन के प्रारम्भिक काल के बीच हुआ है।

➡️यह पर्वत श्रेणियाँ धारवाड़काल के अन्तिम भाग से सम्बन्धित है। इस पर्वतीय श्रेणी की औसत ऊँचाई 930 मीटर के लगभग है, तथा यह राजस्थान के पारितन्त्र (Ecosystem) एवं जलवायु पर गहरा प्रभाव डालती है।
➡️अरावली पर्वत श्रेणियाँ राजस्थान के मध्य भाग से विकर्णवत गुजरती है।
➡️इनका विस्तार उत्तरी-पूर्वी भाग में दिल्ली से दक्षिण पश्चिमी🤜भाग में गुजरात के मैदानों तक 692 किलोमीटर की लम्बाई में पाया जाता है।
➡️राजस्थान में झुंझुनूं जिले की खेतड़ी तहसील से राजस्थान गुजरात सीमा पर खेड़ ब्राह्म (गुजरात) तक 550 किलोमीटर लम्बे क्षेत्र में अरावली पर्वतों का विस्तार पाया जाता है। अरावली पहाड़ियों का प्रदेश राजस्थान के
कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 9.3 प्रतिशत भाग घेरता है एवं यहाँ राजस्थान की लगभग 7 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।
➡️अरावली पर्वत श्रेणियाँ गौण्डवाना लैण्ड का ही भाग है,
जिनका विस्तार राजस्थान में उदयपुर, डूंगरपुर जिलों तथा
राजसमन्द, चित्तौड़गढ़, सिरोही, भीलवाड़ा, बाँसवाड़ा, पाली,
अजमेर, अलवर, जयपुर, सीकर, झुंझुनूं आदि जिलों के निश्चित भागों में पाया जाता है।
➡️यह पर्वत श्रेणी सतत् ना होकर कई स्थानों पर खण्डित है ➡️ र दक्षिण-पश्चिम में सिरोही से प्रारम्भ होकर उत्तर-पूर्व में खेतड़ी तक अरावली पर्वत श्रेणियाँ श्रृंखलाबद्ध है एवं इसके पश्चात् यह छोटी-छोटी पहाड़ियों के रूप में दिल्ली तक विस्तृत है।
इ➡️सका उत्तरी भाग दिल्ली क्रम की चट्टानों (Delhi System Rocks) के रूप में पहचाना जाता है।
➡️अरावली पर्वत श्रेणियों के दक्षिण-पश्चिम भाग से अजमेर के उत्तरी-पूर्वी भाग तक ये एक सतत् क्रम दर्शाती हैं।
➡️ इसके बाद उत्तरी भागों में अरावली पर्वत श्रेणियाँ विभिन्न
समानान्तर खण्डित श्रृंखलाओं में पायी जाती है।
➡️दक्षिण-पश्चिम भाग में इन अरावली पर्वत श्रेणियों की महत्वपूर्ण पहाड़ी संरचना सिरोही, उदयपुर एवं डूंगरपुर जिलों में पायी जाती है।
➡️उत्तर-पूर्व में जयपुर तथा अलवर के क्षेत्रों में इनकी पहाड़ी संरचना महत्वपूर्ण है।
➡️ सिरोही जिले में माउण्ट आबू के समीप गुरूशिखर
नामक स्थान पर इन पर्वत श्रेणियों की सबसे ऊँची चोटी
अवस्थित है, जिसकी ऊँचाई 1,722 मीटर है।
➡️अरावली पर्वत श्रेणियों की अन्य महत्वपूर्ण चोटियाँ
निम्नानुसार हैं:-
➡️सेर (Ser)▶️अरावली पहाड़ियों की दूसरी सबसे
ऊँची चोटी, माउण्ट आबू के समीप
स्थित, ऊँचाई 1,597 मीटर
➡️जरगा (Jarga)▶️अरावली पहाड़ियों की तीसरी सबसे
ऊँची चोटी, उदयपुर जिले में स्थित, ऊँचाई 1,431 मीटर
➡️अचलगढ़ ▶️अरावली पहाड़ियों की चौथी सबसे
(Achalgarh)ऊँची चोटी, माउण्ट आबू के समीप,ऊँचाई 1,380 मीटर
➡️रघुनाथगढ़ अरावली पहाड़ियों की पाँचवी सबसे
(Raghunathgarh) ऊँची चोटी, सीकर जिले में
अवस्थित, ऊँचाई 1,055 मीटर
➡️खो ( Kho)▶️ अरावली पहाड़ियों की छठवीं सबसे
ऊँची चोटी, अलवर जिले में स्थित,ऊँचाई 920 मीटर

➡️तारागढ़ (अजमेर), बवाई (खेतड़ी, झुंझुनूं), भैराच
(अलवर) तथा बैराठ (जयपुर) अरावली पर्वत श्रेणियों की
अन्य महत्वपूर्ण चोटियाँ हैं।
➡️अरावली के उत्तरी एवं मध्य भाग की रचना अत्यधिक अवरोध क्षमता वाली क्वार्टजाइट चट्टानों से हुई है तथा दक्षिणी भाग में आबू के समीप ग्रेनाईट चट्टानों की प्रधानता पायी जाती है।
➡️अरावली पहाड़ियाँ भारत की महान् जल विभाजक रेखा का एक भाग है, जो कि अरब सागरीय नदी तंत्र को बंगाल की खाड़ी वाले नदी तंत्र से अलग करती हैं।
➡️अरावली पहाड़ियाँ दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में बहने वाली मानसूनी हवाओं के समानान्तर पायी जाती है, जिससे ये इन दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं के लिए अवरोध का काम नहीं करती। परिणामस्वरूप आर्द्रता युक्त बादल राजस्थान के क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं कर पाते हैं।
➡️अरावली पहाड़ियों की अवस्थिति पूर्वी भाग में मरूस्थलीकरण के फैलाव को रोकने में सहायक है।
➡️पहाड़ियों के अतिरिक्त इस भौगोलिक प्रदेश में चट्टानी उच्च भूमियाँ उथले एवं मध्यम गहराई वाले जलोढ़ तथा मृतिका मिश्रणयुक्त मैदान तथा सँकड़े जलोढ़ मैदान भी कुछ स्थानों पर पाये जाते हैं।

✳️मध्य अरावली पहाड़ियाँ✳️ (Central Aravalli
Hills)-▶️
➡️अलवर पहाड़ियों के दक्षिण में मध्य अरावली पहाड़ियाँ विस्तारित
हैं। यह क्षेत्र चार उप प्रदेशों में बाँटा जा सकता है-
🤜(i) साँभर बेसिन (Sambhar Basin)-▶️यह प्रदेश मिट्टी की पहाड़ियों व निम्न भूमियों वाला क्षेत्र है, जहाँ आन्तरिक जल प्रवाह तंत्र पाया जाता है।
▶️यहाँ लवणीय निम्न भूमियाँ एवं अनेकों खारे पानी की झीलें पायी जाती हैं।
▶️साँभर, नावाँ, कुचामन, डेगाना, डीडवाना आदि महत्वपूर्ण खारे पानी की झीलें हैं।
▶️साँभर झील भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है,
जो कि जयपुर से पश्चिम में 65 किलोमीटर की दूरी पर
अवस्थित है।
▶️इसकी चौड़ाई 4.5 से 16 किलोमीटर के बीच पायी जाती है,जहाँ वर्षा ऋतु में यह अपना अधिकतम विस्तार प्राप्त करती है।
▶️ग्रीष्म ऋतु में साँभर झील लगभग सूख जाती है।
▶️इस क्षेत्र में अरावली पर्वतों में कई समानान्तर श्रेणियाँ पायी जाती हैं, जिनमें सिलिका फाइलाईट तथा स्लेट जैसे कई कठोर तत्वों की अच्छी मात्रा देखी जाती है।
▶️क्वार्टजाईट चट्टानों से ढकी हुई पर्वत श्रेणियों के ढ़ाल बंजर पाये जाते हैं । इस प्रदेश की औसत ऊँचाई 400 मीटर है।

✳️मेरवाड़ पहाड़ियाँ✳️ (Merwar Hills)-▶️इन पहाड़ियों की औसत ऊँचाई 550 मीटर है। 
▶️इन पहाड़ियों का विस्तार अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़ आदि क्षेत्रों में पाया जाता है।
▶️इनका उच्चतम शिखर अजमेर के निकट तारागढ़ (870
मीटर) है।
▶️मेरवाड़ पहाड़ियाँ, मारवाड़ के मैदानों को मेवाड़ के उच्च
पठार से अलग करती है।
▶️ये पहाड़ियाँ विभिन्न समीपवर्ती पहाड़ियों के समानान्तर अनुक्रम में दृष्टिगोचर होती हैं।
▶️यहाँ पहाड़ियों एवं घाटियों का अनुक्रम अजमेर जिले के दक्षिणी भाग तक विस्तृत है जहाँ वे मेवाड़ की उच्च पठारी भूमि से मिल जाती है।
▶️इसके पश्चिमी भाग पर पहाड़ियाँ बहुत ही प्रबल एवं प्रपाती

✳️भोराठ का पठार✳️(Bhorat Plateau)-▶️इसे मेवाड़ चट्टानी प्रदेश भी कहा जाता है।
▶️ मेवाड़ पहाड़ियाँ, वल्लभनगर एवं माऊली को छोड़कर सम्पूर्ण उदयपुर, दक्षिण-पूर्व पाली एवं राजसमन्द जिले की राजसमन्द तहसील क्षेत्रों में विस्तारित है। इस प्रदेश का सबसे ऊँचा क्षेत्र भोरात का पठार है।
▶️भोरात के पठार का विस्तार कुम्भलगढ़ से गोगुन्दा तक पाया जाता है, जहाँ इसकी औसत ऊँचाई लगभग 1,225 मीटर है। इस पठार का सबसे ऊँचा शिखर जरगा पर्वत है, जिसकी ऊँचाई 1,431 मीटर है।
▶️ भोरात पठार एवं उसके आस-पास की कटकें एक जटिलगाँठ (Complex Knot) बनाती हैं जिससे सभी दिशाओं में कई पहाड़ियाँ एवं कटकें निकलती हैं।
▶️ इसके दक्षिणी-पश्चिमी तथा दक्षिणी-पूर्वी भाग से निकलने वाली पहाड़ियाँ व पर्वत स्कन्ध पूर्व में सिरोही एवं डूंगरपुर तक विस्तारित हैं।

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अरावली की प्रमुख चोटियां
अरावली पर्वतमाला किसका अवशेष है
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अरावली पर्वतमाला के प्रमुख दर्रे
उत्तरी अरावली की सबसे ऊंची चोटी
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मध्यवर्ती अरावली पर्वतीय प्रदेश⬅️






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