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राजस्थान में खारे पानी की झीलें व मीठे पानी की झीलें | heetzthefly

✳️राजस्थान की झीलों को दो वर्गों में विभक्त किया गया है-✳️
1. खारे पानी की झीलें
 2. मीठे पानी की झीलें
✳️खारे पानी की झीलें➡️

➡️इसके अन्तर्गत सांभर, डीडवाना, पंचपदरा, फलौदी कायोद,लूणकरणसर, तालगपर, कोछोर व रैवासा आदि झीलें आती है।
➡️राजस्थान में खारे पानी की झीलें टेथिस महासागर के अवशेष है। ये प्रायः राज्य के उत्तरी-पश्चिमी मरूस्थलीय भाग में पाई
जाती है। राजस्थान में सर्वाधिक खारे पानी की झीलें नागौर जिले में स्थित है।
💠सांभर झील-➡️
➡️यह फुलेरा (जयपुर) के निकट स्थित है।
➡️यह राजस्थान की सबसे बड़ी खारे पानी को झोल है।
➡️ इस झील के देश का 8.7 प्रतिशत नमक बनाया जाता है। यहाँ पर नमक का उत्पादन हिन्दुस्तान साल्ट कंपनी द्वारा किया
जाता है जो कि केन्द्र सरकार का उपक्रम है।
➡️बिजोलिया शिलालेख में यह ठाल्लेख मिलता है कि इस झील का निर्माण वासुदेव चौहान द्वारा करवाया गया था। 
➡️इस झील को लम्बाई 32 किमी. तथा चौड़ाई 8-12 किमी, है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 500 वर्ग किमी. है।

➡️इस झील में मेघना, मेन्या, रूपनगढ़, खारी व खंडेल आदि नदियाँ आकर गिरती है।

➡️इस झील परदेश का एकमात्र साल्ट म्यूजियम स्थित है। जो 7870 ई. में अंग्रेजों द्वारा निर्मित किया गया था।
➡️इस झील को 1990 में रामसर नमभूमि क्षेत्र में सम्मिलित किया गया था। 
➡️इस रामसर नमभूमि क्षेत्र का क्षेत्रफल 24000 हेक्टेयर है। यह राजस्थान का दूसरा रामसर नमभूमि क्षेत्र है।

💠डीडवाना झील-💠
➡️यह नागौर जिले में स्थित है।
➡️इस झील की लम्बाई 4 किमी, तथा चौड़ाई 3-6 किमी, है। 
➡️इस झील का नमक खारे के अयोग्य होने के कारण इससे सोडियम प्रात किया जाता है।

➡️यहाँ राजस्थान स्टेट केमिकल बस नाम से दो उद्योग स्थापित किये गये है जो सोडियम सल्फाइट एवं सोडियम सल्फेट का निर्माण करते है। इस सोडियम का उपयोग कृत्रिम रूप से कागज के निर्माण में काम आने वाले लवण हेतु किया जाता है।

💠पंचभदरा झील-💠

➡️यह बाड़मेर जिले में स्थित है।
➡️पंचा नामक भील द्वारा दलदल को सुखाकर इस झील का निर्माण करवाया गया था।
➡️पंचा ने झील के किनारे खेड़ा पुरखाकी स्थापना की थी।
➡️इस झौल में सर्वोच्च कोटि का नमक प्राप्त होता है। यहाँ के नमक में 98 प्रतिशत सोडियम क्लोराइड की मात्रा पायी जाती है।
➡️इस झील पर खारवाल जाति के लोग परम्परागत तरीकेसे
➡️मोरली झाड़ी की टहनियों का उपयोग करके नमक के स्फटिक बनाने का कार्य करते हैं।

💠फलौदी झील- ➡️यह जोधपुर जिले में स्थित है।

💠कावोद झील-➡️ यह जैसलमेर जिले में स्थित है।

💠लूणकरणसर झील➡️- यह बीकानेर जिले में स्थित है। इसमें नमक का अंश नगग्य है।

💠 तालछापर झील-➡️ यह चूरू जिले में स्थित है।

💠कोछोर झील-➡️ यह सोकर जिले में स्थित है।

💠रैवासा झील-➡️ यह सीकर जिले में स्थित है।

💠 कुचामन झील➡️-यह नागौर जिले में स्थित है।

✳️मीठे पानी की झीलें✳️

💠पुष्कर झील💠
 (इसका निर्माण ज्वालामुखी क्रेटर से
हुआ है।)-
➡️यह पुष्कर (अजमेर) में स्थित है।
➡️यह राजस्थानी की सबसे प्राचीन व पवित्र झील है।
➡️यह एक प्राकृतिक झोल है।
➡️इस झील के किनारे ब्रह्माजी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा को विशाल मेला लगता है।
➡️पुष्कर सरोवर में जमा मिट्टी को निकाल कर गहरा करने का कार्यक्रम
पुष्कर समन्वित विकास परियोजना के अंतर्गत कनाडा सरकार की आर्थिक सहायता से 1997-98 में यहाँ चलाया गया था।
➡️इस झील पर गुरु गोविन्द ने 1705 ई. में गुरु ग्रंथ साहब का पाठ किया था।
➡️कालिदास ने अभिज्ञानशाकुन्तलम् की रचना इसी झील पर की थी।
➡️ऐसौ किदवन्ती है कि वेदव्यास ने महाभारत की रचना इसी झील पर की थी।
➡️ऐसी मान्यता है कि विश्वामित्र ने तपस्या इसी झील पर की थी।
➡️1911ई. में इंग्लैण्ड की महारानी मेरी इस झोल को देखने आई घो, अतः उनके नाम पर मेरी क्वीन जनाना घाट का नाम रखा गया है। किया था, अत: उनके नाम पर रामघाट का नाम रखा गया है।

💠 जयसमंद झील-💠
यह उदयपुर में स्थित है।
यह राजस्थान को सबसे बड़ी कृत्रिम तथा सबसे बड़ी मीठे पानी
की झील है।
यह देश की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झोल है। (गोविन्द सागर झोल-भाखड़ा बांध सबसे बड़ी)
इस झोल को लम्बाई लगभग 15 किलोमीटर तथा चौड़ाई 2- 8 किलोमीटर है।
इस झील को वेबर के नाम से भी जाना जाता है।
इस झोल का निर्माण गोमती नदी पर महाराणा जयसिंह द्वारा
17वीं (1685-91) में करवाया गया। इस झील पर सात बड़े-छोटे टापू है। उनमें सबसे बड़े टापू का
नाम बाबा का भांगड़ा व छोटे का नाम प्यारी है।
इस झोल से सिंचाई के लिए दो नहरें श्यामपुरा व भाट (भट्टा) निकाली गई है। इस झील के निकट एक पहाड़ी पर चित्रित हवामहल स्थित है।

💠 नक्की झील-💠
यह माउंट आबू (सिरोही) में स्थित है।
यह राजस्थान की सर्वाधिक ऊँचाई (1200 मीटर) पर स्थित झील है।
- ऐसी किदवंतो है कि इस झील का निर्माण देवताओं द्वारा नाखूनों से खोदकर किया गया था, अतः इसका नाम नक्की पड़ा।
इस झील पर विभन्न प्रकार की चट्टानों बिखरी पड़ी हुई है, जिनमें एक मेढ़क के आकार को चट्टान है जिसे टॉडरॉक कहा जाता है, 
 एक बूंघट निकाले स्त्री के आकार की चट्टान है जिसे
नन रॉक कहा जाता है।
यह राजस्थान को एकमात्र झील है जो सदियों में अक्सर जम जाती है।
इस झील पर सनसेट प्वाइंट व हनीमून प्वाइंट प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।

💠राजसमंद झील-💠
यह राजसमंद जिले में स्थित है।
इस झील का निर्माण महाराणा राजसिंह द्वारा 1662 ई. में करवाया गया।
इस झील को राजसमुद्र भी कहा जाता है। गोमती नदी इसमें गिरती है।
- इसको सिढ़ी हर तरफ गिनने पर 9 आती है।
इस झोल का उत्तरी भाग १ चौकी कहलाता है, जिस पर संगमरमर के 25 शिलालेख है, जिन पर मेवाड़ का इतिहास रणछोड़ भट्ट द्वारा संस्कृत भाषा में लिखा हुआ है।
 ये विश्व के सबसे बड़े शिलालेखों में से एक है।
- इस शिलालेखों को राजप्रशस्ति कहा जाता है।
- यह झील 6.5 किमी. लम्बी तथा 3 किमो, चौड़ी है।
इस झील के निकट घेवर माता का मंदिर स्थित है।
यह राज्य की एकमात्र झोल है, जिसके नाम पर किसी जिले (राजसमंद) का नामकरण हुआ है।

💠आनासागर झील-💠
यह अजमेर में स्थित है।
इस झोल का निर्माण 1137 ई. में पृथ्वीराज चौहान तृतीय के पितामह अर्णोराज चौहान उर्फ आनाजी द्वारा करवाया गया था।
इसमें बांडी नदी का जल आता है।
इस झील के किनारे जहाँगीर ने दौलतबाग उद्यान बनवाया था |
जो वर्तमान में सुभाष उद्यान के नाम से जाना जाता है।
इस झील पर शाहजहाँ ने संगमरमर की बारह दरियों (दरवाजें) का निर्माण करवाया था।
इस झील की पाल पर शाहजहाँ द्वारा संगमरमर का कटहरा निर्मित करवाया गया था।

💠 फतेहसागर झील-💠
यह उदयपुर में स्थित है।
इस झील का प्रारंभिक निर्माण सन् 1688 ई. में महाराणा जयसिंह द्वारा करवाया गया किन्तु अतिवृष्टि के कारण इसके तहस-नहस हो जाने के पश्चात् इसका पुननिर्माण महाराणा
फतेहसिंह द्वारा 1888 ई. में करवाया था।
- देवाली ग्राम स्थित होने से इसे देवाली तालाव भी कहते है।
- इस झील की आधारशिला एक अंग्रेज अधिकारी इयूक ऑफ कोंट द्वारा रखी गई थी। इसे कनॉट बांध भी कहते हैं।
- इस झील के बीच स्थित टापू पर एक सौर वैद्यशाला स्थित है, जिसकी स्थापना 1975 ई.में अहमदाबाद स्थित संस्थान वैद्यशाला
द्वारा की गई है। 1981 ई. में इस वैद्यशाला को देश के अंतरिक्ष विभाग से जोड़ दिया गया।
- इस झील के किनारे स्थित मोती-मगरी पहाड़ी को महाराणा प्रताप स्मारक के रूप में विकसित किया गया है। महाराणा उदयसिंह ने उदयपुर नगर बसाने के पूर्व इसी पहाड़ी पर मोती महल बनवाया था।
- इस झील के दूसरे किनारे पर 1989 में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा हवाला गाँव में ग्रामीण शिल्प एवं लोक कला परिसर शिल्पग्राम का निर्माण किया गया है।
- इस झील के मध्य में एक बड़े टापू पर नेहरू आइलैण्ड बना हुआ है।

💠 पिछौला झील-💠
- यह उदयपुर में स्थित है।
1362 में निर्मित यह झील एक गांव के नाम पर हैं।

14ची शती के अंत में इस झील का निर्माण महाराणा लाखा के शासनकाल में एक पिच्चू नामक बनजारे द्वारा अपने बेल की स्मृति में करवाया गया था।
- इस झील पर दो टापुओं पर जगमंदिर व जगनिवास महल स्थित जग मंदिर का निर्माण महाराणा कर्णसिंह ने शुरु करवाया।
जगतसिंह प्रथम ने 1651 में इसे पूर्ण करवाया।
- जग निवास महल का निर्माण जगत सिंह द्वितीय द्वारा करवाया।
* पुर्रम (शाहजहाँ) ने विद्रोही दिनों में यहाँ शरण ली थी।
शाहजहाँ को ताजमहल बनाने की प्रेरणा जग मंदिर को देखकर मिली थी।
पिछोला झील में बिजोरो नामक स्थान पर नटनी की स्मृति में नटनी का चबूतरा स्थित है।
- एक टापू पर स्थित अरसो महल गोला बारूद के डोपों के रूप में प्रयोग होता था।
- इस झील को बुझड़ा नदी एवं सीसारमा नदी द्वारा जलापूर्ति की जाती है।

💠फॉयसागर झील-💠
यह अजमेर में स्थित है।
इस झोल का निर्माण सन् 1891-92 के दौरान नगरपरिषद् अजमेर द्वारा अकाल राहत कार्यों के तहत करवाया गया।
इस झील का निर्माण इंजीनियर फॉय के निर्देशन में बांडी नदी पर बाँध बनाकर किया गया एवं इसका नाम फॉयसागर रखा गया।

💠 सिलीसेढ़ झील-💠
यह अलवर जिले में स्थित है। इस झोल को राजस्थान का नंदनकानन कहा जाता है।
इस सौल पर महाराजा विनयसिंह 1844-45 ई. में अपनी पत्नी शिलादेवी को स्मृति में छ. मंजिला एक महल का निर्माण करवाया था जिसे सिलीसेढ़ महल कहा जाता है।
💠जैतसागर झील-💠
यह बूंदी में स्थित है। इस जील का निर्माण जैसा मौणा द्वारा करवाया गया था।

💠 कोलायत झील-💠
यह कोलायत (बीकानेर) में स्थित है।
इस झील पर कार्तिक पूर्णिमा को कपिल मुनि का प्रसिद्ध मेला लगता है।
- यहां पर कपिल मुनि का आश्रम स्थित है।

💠 कायलाना झील-💠
- यह जोधपुर जिले में स्थित है।
इस झील का निर्माण 1872 ई. में सर प्रताप द्वारा करवाया गया
इस झील का अन्य नाम प्रतापसागर झोल भी है।
इस झील द्वारा जोधपुर शहर को पेयजल आपूर्ति की जाती है।

💠सुजानगंगा झील💠-
यह भरतपुर जिले में स्थित है। इस झोल का निर्माण महाराजा
सूरजमल द्वारा करवाया गया था।

💠 बालसमंद झील-💠
यह जोधपुर जिले में स्थित है।
इस झील का निर्माण सन् 1159 में परिहार शासक बालक राव द्वारा करवाया गया था।

💠 उदयसागर झील-💠
यह उदयपुर में स्थित है।
इस झील का निर्माण महाराणा उदयसिंह द्वारा (1559-1565) करवाया गया था।
इस झील का निर्माण आषड़ नदी के पानी से किया गया।
💠नवलखा झील-💠
 यह बूंदी जिले में स्थित है।

💠गैपसागर झील-💠
 यह डूंगरपुर जिले में स्थित है। महारावल
गोपीनाथ द्वारा निर्मित है।

💠तालाबशाही झील💠- यह धौलपुर जिले में स्थित है।

💠 वंद वारंटा झील💠-यह भरतपुर जिले में स्थित है।

💠. गजनेर झील-💠यह बीकानेर जिले में गजनेर स्थान पर इसका निर्माण महाराजा गजसिंह द्वारा अकाल राहत कार्य के रूप में करवाया गया।

💠 बुझ झील💠-जय जैसलमेर जिले में स्थित है।

💠 उम्मेदसागर झील- 💠यह जोधपुर जिले में स्थित है।

💠भोपालसागर झील💠-
यह चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है।
इस झील का निर्माण महाराणा भोपाल सिंह द्वारा करवाया गया

💠 तलवाड़ा झील-💠 यह हनुमानगढ़ जिसे में स्थित है। यह झील
घग्घर नदी के जल से भरती है।

💠प्रीतमपुरी झील (कावट के पास स्थित है।)-💠 यह सीकर जिले में स्थित है।

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