Rbse biology 12th important questions 2021 hindi me | जीव विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्न 2021

आज हम जीवविज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्न जो कि पाठ 3 के है ये प्रश्न exam में आने लायक प्रश्न है है जितने भी प्रश्न है पूरे प्रश्न ध्यान से पड़े और भी आगे प्रश चाहिए तो कंमेंट करे 

1-हरे नारियल का दुदिया जल है
उत्तर- तरल भ्रूणपोस 

2-सपग परागकण पाए जाते है? 
उत्तर- पाइनस

3- स्वबन्ध्यता किसे कहते हैं?
उत्तर-कुछ पौधों के पुष्पों में स्वयं के द्वारा विकसित
परागकणों का उसी पुष्प की वर्तिकान पर अंकुरण नहीं हो।
पाता है, इसे स्वबन्ध्यता कहते हैं। उदा.
(Passiflora), अंगूर (Vitis) आदि।


4.बीजाण्ड में परागनलिका कितने प्रकार से
प्रवेश करती है?
उत्तर—बीजाण्ड में परागनलिका का प्रवेश तीन प्रकार
से हो सकता है-
राखीबेल
(i) बीजाण्डद्वारी प्रवेश (Porogamy)-जब
परागनलिका बीजाण्ड में बीजाण्डद्वार (micropyle) से
प्रवेश करती है तो इसे बीजाण्डद्वारी प्रवेश कहते हैं। यह
अधिकांश पौधों में पाई जाने वाली सामान्य विधि है।
(ii) निभागी प्रवेश (Chalazogamy)-जब
परागनलिका का बीजाण्ड में प्रवेश निभागी छोर (chalazal
end) से होता है तो इसे निभागी प्रवेश कहते हैं। उदा.
कैजुराइना, जुगलैन्स, बिटुला।
(iii) अध्यावरणी प्रवेश (Mesogamy)-जबपरागनलिका अध्यावरणों को बेधती हुई बीजाण्ड में प्रवेश
करती है । उदा. कुकरबिटा, पोपुलस


5-द्विनिषेचन किसे कहते हैं?
उत्तर-आवृतबीजियों में निषेचन की प्रक्रिया दो बार
होती है। अण्डकोशिका तथा नर युग्मक के संलयन को
युग्मक संलयन (gametic fusion or syngamy) अथवा
सत्य चन (true fertilization) कहते हैं। इसके
फलस्वरूप द्विगुणित युग्मनज (diploid zygote) बनता
है। दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केन्द्रक (जो दो ध्रुवीय
केन्द्रकों के संयोजन से बनता है) से संयोजित होकर
त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (Primary endosperm
nucleus) बनाता है। इस प्रक्रिया को त्रिक संलयन (triple
fusion) कहते हैं।
आवृतबीजियों में निषेचन की प्रक्रिया दो बार होती
है। एक नर युग्मक अण्ड कोशिका से तथा दूसरा ध्रुवीय
केन्द्रक से संयोजित होता है। अतः इसे द्विनिषेचन (double
fertilization) कहते हैं। द्विनिषेचन का अध्ययन सर्वप्रथम
नावाश्चिन (Nawaschin, 1898) ने फ्रिटिलेरिया व
लिलियम नामक पौधों में किया था।

6-द्विनिषेचन का महत्त्व बताइये।
उत्तर-निषेचन के बाद द्विगुणित युग्मनज भ्रूण का
निर्माण करता है तो प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक भ्रूणपोष में
विकसित होता है। यह प्रक्रिया द्विनिषेचन से होती है,
अतः इसके निम्न महत्त्व हैं-
1विकसित होते हुए भ्रूण के लिए पर्याप्त पोषण
की आवश्यकता होती है। द्विनिषेचन के फलस्वरूप बना
भ्रूणपोष विकसित होते हुए भ्रूण को पोषण प्रदान करता
(ii) त्रिगुणित भ्रूणपोष में नर व मादा दोनों जनक
पादपों के गुणसूत्र विद्यमान होते हैं । अतः ऐसे पोषण को
प्राप्त करके स्वस्थ व सबल भ्रूण तथा आगे चलकर स्वस्थ
संतति वाले पौधे विकसित होते हैं।
(iii) अनावृतबीजी (Gymnosperm) पादपों में
भ्रूणपोष अगुणित व निषेचन से पूर्व बनता है। यदि किसी
कारण से इनमें निषेचन न हो तो भ्रूणपोष की उपयोगिता
नहीं होती है। परन्तु द्विनिषेचन क्रिया में तो यदि भ्रूण
बनता है तो ही भ्रूणपोष बनता है अन्यथा नहीं।

7-कुछ बीजों को असंगजनिक बीज क्यों
कहते हैं? इस प्रकार के बीजों का इस्तेमाल करने वाले
किसानों को होने वाले एक लाभ और एक हानि का
उल्लेख कीजिए।
(CBSE, 2015)
उत्तर—बिना निषेचन के उत्पन्न हुए बीजों को
असंगजनिक बीज कहते हैं।
संकर किस्मों की कृषि से उत्पादकता बहुत अधिक
बढ़ गई है। संकर बीजों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि
इन्हें प्रत्येक फसल के लिए तैयार करना होता है। यदि संकर
किस्म के संग्रहीत बीज को बुआई करके प्राप्त किया जाता
है तो उसकी पादप संतति संकर बीज की विशिष्टता को
यथावत् बनाए रख नहीं पाती । यदि संकर बीज असंगजनन
द्वारा तैयार किये जाते हैं तो संकर संतति मूल विशिष्टता को
फसल-दर फसल प्रदर्शित करती रहेगी और प्रतिवर्ष संकर
बीजों को प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

8-पराग-स्त्रीकेसर संकर्षण (पारस्परिक
क्रिया) को विस्तार से समझाइए।
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2014)
उत्तर-पुष्पी पादपों के पुष्प के वर्तिकाग्र पर पराग
अवस्थित होने से लेकर बीजाण्ड में पराग नलिका के
प्रविष्ट होने तक की सभी घटनाओं को परागस्त्रीकेसर
संकर्षण के नाम से सम्बोधित किया जाता है। परागण
क्रिया के द्वारा परागकणों का स्थानान्तरण तो होता है
परन्तु यह सुनिश्चित नहीं होता है कि उसी प्रजाति का
सुयोग्य पराग वर्तिकाग्र तक पहुँचे। कभी-कभी गलत
प्रकार के पराग भी उसी वर्तिकान पर आ जाते हैं (जिसमें
ये, या तो उसी पादप से होते हैं या फिर अन्य पादप
से)। स्त्रीकेसर में यह सक्षमता होती कि वह पराग को
पहचान सके कि वह उसी वर्ग के सही प्रकार का पराग
(सुयोग्य) है या फिर गलत प्रकार का (अयोग्य) है।
यदि पराग सही प्रकार का होता है तो स्त्रीकेसर उसे
स्वीकार कर लेता है तथा परागण-पश्च घटना हेतु
प्रोत्साहित करता है जो कि निषेचन की ओर बढ़ता है।
यदि पराग गलत प्रकार का होता है तो स्त्रीकेसर वर्तिकाग्र
पर पराग अंकुरण या वर्तिका में पराग नलिका वृद्धि
रोककर पराग को अस्वीकार कर देता है। पराग कोपहचानने की यह क्षमता स्त्रीकेसर तथा पराग के
रासायनिक घटकों के संकर्षण द्वारा होती है। वैज्ञानिकों ने
स्त्रीकेसर एवं पराग के घटकों को जानकर उनके बीच
संकर्षण (परस्पर क्रिया) को स्वीकृति या अस्वीकृति के
रूप में जाना है।
सुयोग्य परागकण होने पर, परागकण वर्तिकान पर
अंकुरित होकर जनन छिद्र के माध्यम से एक परागनलिका
उत्पन्न करते हैं। परागनलिका वर्तिकान तथा वर्तिका के
ऊतकों के माध्यम से वृद्धि करती है और अण्डाशय तक
पहुँचती है। अण्डाशय में पहुँचकर बीजाण्ड द्वार के
माध्यम से बीजाण्ड में प्रवेश करती है।


9-प्रतीप बीजाण्ड (Anatropous ovule)
की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2019)
उत्तर-एक प्रारूपिक प्रतीप बीजाण्ड लगभग गोलाकार
संरचना होती है। इसका मुख्य भाग मृदूतकीय कोशिकाओं
द्वारा निर्मित होता है जिसे बीजाण्डकाय (Nucellus) कहते
हैं। यह प्राय: एक या द्विस्तरीय आवरण से घिरा रहता है
जिन्हें अध्यावरण (Integument) कहते हैं।
बाहरी आवरण बाह्य अध्यावरण एवं आन्तरिक आवरण
अन्तःअध्यावरण कहलाता है। अध्यावरण बीजाण्डकाय को
पूर्ण रूप से नहीं ढकते हैं वरन् इसका कुछ
भाग एक
पतली नलिका जैसी संरचना का निर्माण करता है जिसे
बीजाण्डद्वार (Micropyle) कहते हैं। बीजाण्डकाय का
आधारीय भाग निभाग (Chalaza) कहलाता है। निभाग
से अध्यावरणों की उत्पत्ति होती है। बीजाण्ड में बीजाण्डद्वार
के समीप मादा युग्मकोद्भिद के रूप में भ्रूणकोष (Embryo
sac) पाया जाता है। भ्रूणकोष में बीजाण्डद्वार छोर की
तरफ तीन कोशिकाओं का समूह पाया जाता है, जिसे
अण्ड समुच्चय (Egg apparatus) कहते हैं। इसमें नाशपाती
के आकार की कोशिका अण्डकोशिका (Egg cell) तथा
शेष दो पाीय कोशिकाएँ सहायक कोशिकाएँ (Synergids)
कहलाती हैं। निभागी छोर की तरफ भ्रूणकोष में तीन
प्रतिमुखी कोशिकाएँ (Antipodal cells) उपस्थित होती
हैं। भ्रूणकोष के मध्य में केन्द्रीय कोशिका (Central cell)
उपस्थित होती है, जिसमें दो अगुणित ध्रुवीय केन्द्रक
उपस्थित होते हैं जो निषेचन से ठीक पूर्व संयुक्त होकर
falufera feriteran digitch (Secondary or definitive
nucleus) का निर्माण करते हैं 
संरचना__ प्रतिप बीजांड ,की



 

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