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इंदिरा गांधी नहर अपरियोजन | विस्तार से जानकारी

इंदिरा गांधी नहर परियोजना 
➡️इस राजस्थान की मरुगंगा' कहा जाता है।
इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना की प्रेरणा गंगनहर से मिली थी।
इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना के प्रणेता तत्कालीन बीकानेर
रियासत के सिंचाई इंजीनियर श्री कँवरसेन थे। इन्होंने
1948 ई. में एक पुस्तक लिखी थी। 'बीकानेर रियासत
में पानी की आवश्यकता' । इसी पुस्तक में सर्वप्रथम इस
परियोजना का उल्लेख हुआ था।
इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना का श्रीगणेश तत्कालीन
केन्द्रीय मन्त्री श्री गोविन्दवल्लभ पंत ने 31 मार्च, 1958
को किया था।
इस परियोजना के अन्तर्गत सर्वप्रथम पंजाब के फिरोजपुर
जिले में सतलज एवं व्यास नदियों के संगम पर 'हरिके
बैराज' का निर्माण किया गया था।
इस परियोजना का निर्माण दो चरणों में किया गया था।

💠प्रथम चरण💠
प्रथम चरण में 204 किमी. लम्बे राजस्थान फीडर तथा
189 किमी. लम्बी मुख्य नहर का निर्माण किया गया था।
राजस्थान फीडर हरिके बैराज से मसीतावाली हैड
हनुमानगढ़ तक है।
राजस्थान फीडर राजस्थान में प्रवेश खार (खाराखेड़ा)
हनुमानगढ़ जिले में होता है।
राजस्थान फीडर का 169 किमी. भाग पंजाब तथा
हरियाणा में है तथा 35 किमी. भाग राजस्थान में है।
प्रथम चरण की मुख्य नहर मसीतावाली हैड (हनुमानगढ़
से बीकानेर जिले में छतरगढ़ के निकट सत्तासर तक
है
(189 किमी.)।
नोट : राजस्थान सरकार के इन्दिरा गाँधी नहर विभाग के प्रगति विवरण में राजस्थान फीडर की राजस्थान में लम्बाई 34 किमी. दी हुई है।
प्रथम चरण में 3075 किमी. लम्बी वितरिकाओं का निर्माण
किया गया था।
प्रथम चरण में सूरतगढ़ शाखा, अनूपगढ़ शाखा व पूंगल
शाखा का निर्माण किया गया था।
प्रथम चरण का निर्माण 1975 ई. में पूरा हो गया था।
राज्य सरकार द्वारा 16.17 लाख हैक्टेयर सिंचित क्षेत्र में
प्राथमिकता से नहर निर्माण कार्य पूर्ण करने का निर्णय
लिया गया है, जिसमें से मार्च, 2015 तक 16.06 लाख
हैक्टेयर क्षेत्र (5.46 लाख हैक्टेयर प्रथम चरण में एवं
10.60 लाख हैक्टेयर द्वितीय चरण में) सिंचाई हेतु खोला
जा चुका है।

💠द्वितीय चरण💠

इन्दिरा गांधी परियोजना के द्वितीय चरण में 256 किमी.
लम्बी मुख्य नहर का निर्माण किया गया है।
द्वितीय चरण का कार्य प्रारम्भ में मोहनगढ़ जैसलमेर तक
प्रस्तावित था, वर्तमान में इसे बढ़ाकर गडरा रोड बाड़मेर
तक प्रस्तावित कर दिया है, इसीलिए वर्तमान में इस
परियोजना का अन्तिम छोर अथवा जीरो प्वाइंट गड़रारोड
(बाड़मेर) को कहा जाता है।
इस परियोजना के द्वितीय चरण में 5112 किमी. लम्बी
वितरिकाओं का निर्माण किया गया है।
इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना के प्रथम चरण में एक तथा
द्वितीय चरण में छः अर्थात् कुल सात लिफ्ट नहर निर्माण
किया गया है।
इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना प्रकृति की विपमताओं से
मनुष्य के साहसपूर्ण संघर्ष का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस अत्यन्त महत्त्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी राजस्थान की सदियों
से प्यासी मरुभूमि को दूरस्थ हिमालय के जल से सिंचित करना जी तथा यहाँ के करोड़ों निवासियों को पेयजल प्रदान करना है। इस विपरियोजना को दो चरणों में पूर्ण किया जाना है। प्रथम चरण का कार्य पूर्ण हो चुका है एवं दूसरे चरण का कार्य प्रगति पर है। या राज्य सरकार द्वारा 16.17 लाख हैक्टेयर सिंचित क्षेत्र में प्राथमिकता
से नहर निर्माण कार्य पूर्ण करने का निर्णय लिया गया है, जिसमें से मार्च, 2016 तक 16.06 लाख हैक्टेयर क्षेत्र (5.46 लाख हैक्टेयर प्रथम चरण में एवं 10.60 लाख हैक्टेयर द्वितीय चरण में) 
सिंचाई हेतु खोला जा चुका है।
द्वितीय चरण के कार्यों में संशोधित प्राक्कलन (2010) के
व अनुसार कुल लागत र 6,921.32 करोड़ है।₹ 5887.56 करोड़ के कार्यों (पानी के खालों के अतिरिक्त) में से 74105.59 करोड़
राशि का व्यय योजना प्रारम्भ से मार्च, 2016 तक हुआ है। इस परियोजना के प्रथम एवं द्वितीय चरण पर मार्च, 2016 तक 4679.21 करोड़ व्यय किए जा चुके हैं।
वर्ष 2016 17 में आयोजन मद मेंर 287.90 करोड़ स्वीकृत
किए गए हैं, जिसमें से कैवरसेन लिफ्ट योजना हेतु 12.90
करोड़ तथा बीकानेर, जैसलमेर सम्भाग के द्वितीय चरण की नहर। के गए आवश्यक कार्यों तथा उनके रखरखाव हेतु र 285 करोड़ आवंटित किए गए, जिनके विरुश दिसम्बर, 2016 तकर 129.71 करोड़ व्यय किए जा चुके हैं।
परियोजना में उपलब्ध पानी के कुशलतम व अधिकतम
उपयोग हेतु द्वितीय चरण लिफ्ट योजनाओं में फव्वारा सिंचाई
व्यवस्था स्थापित करने का निर्णय किया गया है। इस हेतु वर्ष
2007-08 में 27,449 हैक्टेयर में एक पायलट प्रोजेक्ट आरम्भ किया गया था, जिसमें विभाग द्वारा करवाए जाने वाले सभी कार्य  पूर्ण हो चुके हैं। सभी जल उपभोक्ता संगठनों का गठन कर
21,262 हैक्टेयर क्षेत्र में विद्युत कनेक्शन प्राप्त कर फव्वारा परति से सिंचाई आरम्भ की जा चुकी है। सिंचित क्षेत्र विकास एवं
जल प्रबन्धन कार्यक्रम के अन्तर्गत द्वितीय चरण के शेष 3.20
लाख क्षेत्र की लिफ्ट योजनाओं के लिए भारत सरकार सेर 1658.81
करोड़ प्राप्त हुए है। वर्ष 2016-17 के दौरान दिसम्बर, 2016 तक
66 जल उपभोक्ता संगठनों का गठन किया जा चुका है।
भू-जल
राज्य के भू-जल संसाधनों के विकास एवं प्रबन्धन हेतु भू-
जल विभाग को महत्त्वपूर्ण भूमिका है। राजस्थान में, जहाँ अकाल
की स्थिति रहती है, ऐसे में जल की कमी की समस्या के
समाधान हेतु काफी हद तक भू-जल ने महत्त्वपूर्ण भूमिका
निभाई है। सतत् एवं सफल प्रयासों से राज्य के रेगिस्तानी व
पहाड़ी जिलों में सिंचाई के लिए भूमिगत जल जुटाने के अतिरिक्त
स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बढ़ी है। भू-जल विभाग मुख्यतः
निम्नलिखित गतिविधियां संचालित करता है:
सर्वेक्षण एवं अनुसंधान कार्यक्रम के अन्तर्गत नलकूपों व
पीजोमीटर की संरचना का निर्माण एवं जल संसाधनों की
'खोज, मूल्यांकन एवं विकास करना।
- पेयजल एवं अन्य उद्देश्य हेतु नलकूपों व हैण्डपम्पों का
निर्माण करवाना।
सरकार की व्यक्तिगत लाभ की योजनाओं के अन्तर्गत
व्यक्तिगत लाभ देने हेतु कुँओं को विस्फोटन द्वारा गहरा कर
लाभान्वित करना।
वर्ष 2016-17 में किसानों के लिए दिसम्बर, 2016 तक
176 नलकूप, 167 हैण्डपम्प, । पीजोमीटर का निर्माण एवं 5 कुँओं को गहरा किया गया है। इसके अतिरिक्त सर्वेक्षण एवं
अनुसंधान कार्यक्रम के अन्तर्गत 14,620 कुँओं का सर्वेक्षण, 11,488 जल नमूनों का एकत्रीकरण, 8,351 जल नमूनों के रासायनिक  विश्लेषण एवं 274 स्थानों पर भू भौतिकीय सर्वेक्षण कार्य पूर्ण हो चुके हैं। यूरोपियन यूनियन राज्य सहभागिता कार्यक्रम के तहत
राज्य के भू-जल संसाधन के प्रबन्धन हेतु जनता की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु र 1.55 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। एक बार में एक लिफ्ट 60 मीटर की ऊँचाई तक जलोत्थान
करती है।


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