उच्च न्यायालय (Higth court) | उच्च न्यायालय की जनकारी विस्तार से

उच्च न्यायालय (Higth court)



⏺️उच्च न्यायालय की विस्तार से जानकारी 👉
संविधान के अनुच्छेद 214 के तहत् प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय के गठन की व्यवस्था की गई है। उन न्यायालय किसी राज्य की सर्वोच्च न्यायिक सत्ता होती है। राज्य के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (कॉलेजियम की सिफारिश पर)तथा संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के उपरांत की जाती है तथा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (कॉलेजियम की सिफारिश पर),संबंधित राज्य के राज्यपाल व उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर की जाती है। उच्च न्यायालय के
अलावा राज्य के सभी अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है। प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था है (अनु. 214) परन्तु दो या अधिक राज्यों के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था भी की जा सकती है (अनु.231) यदि वे राज्य ऐसा चाहें। वर्तमान देश में 25 उच्च न्यायालय हैं। 25वाँ उच्च न्यायालय आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय अमरावती में गठित किया गया है। वर्तमान में निम्न राज्यों एवं संघ क्षेत्रों के एक ही उच्च न्यायालय है-

⏺️ वॉम्बे हाईकोर्ट-👉 महाराष्ट्र, गोवा, दादरा व नगर हवेली
तथा दमन व दीव

⏺️कलकत्ता हाईकोर्ट-👉 पश्चिम बंगाल, अंडमान व निकोबार

⏺️ गुवाहाटी हाईकोर्ट-👉अरुणाचल प्रदेश, आसाम, नागालैंड, मिजोरम

⏺️केरल हाईकोर्ट, कोच्चि- 👉केरल व लक्षद्वीप

⏺️मद्रास हाईकोर्ट, चेन्नई- 👉तमिलनाडु, पुडुचेरी

⏺️पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़- 👉पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़

⏺️जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट-👉जम्मू-कश्मीर व लद्दाख केन्द्र
शासित क्षेत्र

🔘 उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की योग्यताएँ: [अनुच्छेद
217( 2 )]➡️
1. भारत का नागरिक हो।
2. कम से कम 10 वर्षों तक न्यायिक पद पर कार्य करने
अथवा कम से कम लगातार 10 वर्षों तक उच्च न्यायालय
में वकील के रूप में कार्य करने का अनुभव हों | 

⏺️कार्यकाल: 👉उच्च न्यायालय का प्रत्येक न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश सहित) 62 वर्ष की आयु तक अपने पट पर बना रह सकता है। (अनु. 217) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की न्यूनतम आयु निर्धारित नहीं है।

⏺️शपथ:👉 उच्च न्यायालय के न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश सहित) को पदग्रहण से पूर्व संबंधित राज्य के राज्यपाल के समक्ष शपथ ग्रहण करनी होती है।

⏺️त्यागपत्र: 👉राष्ट्रपति को लिखित एवं हस्ताक्षरित त्यागपत्र देकर अपने पद से मुक्त हो सकते हैं।

⏺️पदमुक्तिः 👉समय से पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की तरह केवल अक्षमता एवं कदाचार के आरोप में संसद के महाभियोग द्वारा राष्ट्रपति के आदेश से पदमुक्त किया जा सकता है। अनु. 217(1) ख)

Note ➡️सेवानिवृत्ति के बाद किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट या अन्य उच्च न्यायालयों को छोड़कर उसी उच्च न्यायालय में या अधीनस्थ न्यायालयों में वकालात नहीं कर सकते एवं न ही सरकार के अधीन कोई लाभ का पद ग्रहण कर सकते हैं (अनु. 220)। इनके वेतन एवं परिलाभ संविधान में वर्णित है जिनमें संसद समय-समय पर संशोधन कर सकती है। इन पर राज्य विधायिका में मतदान नहीं हो सकता है।



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