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मानव परिसंचरण तंत्र (Human Circulatory system ) मानव में हृदय परिसंचरन तंत्र

मानव परिसंचरण तंत्र (Human Circulatory system ) 


 इसकी खोज 👉 सर विलियम हार्वेे व मार्सेली इन दोनों वैज्ञानिकों ने रुधिर परिसंचरण तंत्र के बारेे में बताया थाा
  
👉 उन्होंने बताया कि मनुष्य में बंद परिसंचरण तंत्र पाया जाता है
👉 उन्होंने बताया कि कीटों में खुला परिसंचरण तंत्र पाया जाता है
👉 उन्होंने बताया कि मैं मानव रुधिर का PH 7.3 से 7.4 होता है और यह हल्का शारीय होता है

रुधिर वाहिकाए

रुधिर वाहिकाए 3 प्रकार की होती है

1  धमनिया (arteries)👉 धमनिया रक्त को हृदय से शरीर के अंदर विभिन्न अंगों तक ले जाती है इनमें से शुद्ध रक्त का संचरण होता है

2 शिराए (Veins)👉 शिराए अशुद्ध रक्त को अंगों से हृदय तक लाने का कार्य करते हैं

3 केशिकाए (capillaries)👉  अति सुश्म पतली  बीपी वाली नली का ही होती है जो इनके कोशिकाओं के मध्य रुधिर द्वारा पदार्थों का विनिमय होता है यह कैसी काय कहलाती है

हृदय  

👉 मानव का जो हृदय होता है वह पेशी उत्तको  बना होता है यह जो होता है वह हाथ की मुट्ठी के आकार का होता है इसके चार कोष्टक होते हैं
1. दाया आलिंद 
2. बाया आलिंद
3. दाया निलय
4. बाया निलय

👉 मनुष्य का  जो ह्रदय होता है वह प्रति मिनट 72 बार धड़कता है
👉 नवजात शिशु का जो ह्रदय होता है वह प्रति मिनट 130 बार धड़कता है

  हृदय में रक्त का प्रवाह

1 शुद्ध रक्त 👉 फेफड़ों से ऑक्सिक्रेट होकर रक्त फुसफुस शिरा से बाया आलींद  में आता है और फिर बाया निलय से होता हुआ महाधमनी द्वारा पूरे शरीर में प्रवाहित होता है
महाधमनी > शरीर की सबसे बड़ी धमनी महाधमनी

 2 अशुद्ध रक्त👉 महाशीरा द्वारा अशुद्ध रक्त दाए आलिंद में आता है और फिर दाएं निलय  में होता हुआ फुसफुस धमनी द्वारा फेफड़ों में ऑक्सिक्रेट होने जाता है तत्पश्चात फेफड़ों से ऑक्सीकरण रक्त ह्रदय में आता है

लसीका तंत्र (lymphatic system)

👉 जो लसीका वाहिनी होती है उनमें लसीका बहती है जिसका कार्य कोशिका एवं रुधिर के मध्य पदार्थो के विसरण में सहायता पहुंचाना एवं रुधिर से विसरित प्रोटीन एवं स्वेत कानिकाओ  को वापस रुधिर तक ले जाना है
इनकी जो संरचना होती है वह हमेशा उसको से हृदय की और होती है लसिका वाहिनी याशिरो में जाकर खुलती है इन वाहिनीयों के मार्ग में मुख्यतः गले ,बगल ,जांग एवं पेट आदि में लसिका ग्रंथियां होती है
👉 जो लसीका ग्रंथि होती है वह हमारे शरीर को रोग प्रतिरोधकता में प्रमुख भूमिका निभाती है

ह्रदय व धमनी संबंधी रोग

आर्टरियोस्कक्लेरिसिस👉 धमनी की दीवारों का अपेक्षाकृत कठोर हो जाना

थ्रोंबोसिस👉 इसमें रुधिर वाहिका के भीतर रुधिर का थक्का जम जाता है

हृदय मरमर👉 कहीं बच्चों में हृदय  सामान्य परिवर्तित नहीं होता है और शुद्ध अशुद्ध रुधिर मिल जाते हैं या नीलाए से आलिंद में रुधिर पुणे टपकने लगता है जिससे हृदय मरमर होता है




  

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