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Why khejaldi trees are very important for Bishnoi community? अमृता देवी | खेजलडी पेड़


विश्नोई समाज के लिए पेड़ इतना महत्वपूर्ण क्यों हे 

विस्तार से पूरी गटना कृपया ध्यान से व् पूरा पड़े 

👉यह घटना सन 1730 की घटना है सन 1730  कें जोधपुर के राजा अभय सिंह ने युद्ध जीतकर जोधपुर वापस आकर नया महेल  बनवाने की सोची और महल बनाने के लिए चुने की आवश्यकता थी और चुना बनाने के लिए लकड़ियों की आवश्यकता थी और राजा अभय सिंह  ने अपने मंत्री गिरधारी लाल से पूछा चुना बनाने के लिए  लकड़ी कहां से लाएं फिर मंत्री  ने कहा कि अपने पास एक है  खेजड़ली गांव वहां पर खेजड़ी के पेड़ बहुत सारे हैं वहां से लकड़ी ला सकते हैं और फिर राजा ने आदेश लिए दिया कि खेजड़ली गांव से लकड़ी ली जाए और फिर राजा के सैनिक  लकड़ी काटने के लिए खेजड़ली गांव पहुंच गए और वहां बिश्नोई समाज का गांव था और सैनिक सबसे पहले अमृता देवी के घर के पास पहुंच गए वहां पर पेड़ को काटने लगे अमृता देवी के विरोध करने लगी और उसके साथ-साथ गांव के पूरे बिश्नोई समाज के लोग भी इनका विरोध करने लगे और ऐसे ही करके बिश्नोई समाज का पूरा गांव वहां पर इकट्ठा हो गया और फिर विरोध का सामना करने के बाद सैनिक वापस  महल लौट गए और फिर जोधपुर की राजा अभय सिंह ने रात को लकड़ी काटने की योजना बनाई और जैसे ही रात को ही सैनिक वापस अमृता देवी के घर के पास  पेड़ को काटने लगे और अमृता देवी की नींद खुल गई और वापस विरोध करने लगी और भी हमेशा देवी ने कहा कि यह पेड़ है जो हमारे परिवार का हिस्सा है जिसे हम नही काटने देंगे ऐसा कह कर के अमृता देवी पेड से लिपट गई सैनिकों ने अमृता देवी का सर धड़ से अलग कर दिया है और यह खबर आस-पास के गांव में तेजी से फैल गई इसके बाद सभी गांव वाले वहां पर इकट्ठे होने लगे और पेड़ों से लिपट गए रुक लिपट गई और सैनिकों ने उन उन लोगों का सर धड़ से अलग करते रहे और रुक बलिदान देते रहे पेड़ों के लिए उसमें 363 लोगों की जान चली गई थी और यह खबर राजा तक पहुंच गई और राजा भी भावुक सो गया और उसके पेड़ काटने  पर रोक लगा दी और अभय सिंह ने पेड़ों की रक्षा के लिए नए नियम लागू कर दिए और यह जो अंदर हुआ था उसे चिपको आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है 



चिपको आन्दोलम में मरने वालो की सख्या 

 कुल मरने वालों की संख्या-363

 महिलाएं-69

 पुरुष-294 



यह गटना कब हुई


 👉 यह घटना 21 सितंबर 1730 मंगलवार 


खेजड़ली गांव कहां स्थित है

👉 यह गांव राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित है 



बिश्नोई  समाज को  पर्यावरण का रक्षक क्यों कहा जाता है


👉बिश्नोई समाज अधिकतर जोधपुर जैसलमेर बीकानेर बाड़मेर में निवास करते हैं और उन्हें अच्छे से पता है कि पर्यावरण में पेड़ों का कितना महत्व है और वह पेड़ों के साथ-साथ पानी के बचाव में भी सबसे ऊपर आते हैं

 बिश्नोई समाज के लोग संत जांभोजी की अनुयाई है जो प्रकृति एवं जीवो के संरक्षण के लिए ही माने जाते हैं


बिश्नोई टाइगर फोर्स क्या है

👉 टाइगर फोर्स एक जीवों के संरक्षण व पेड़ पौधों की रक्षा वह शिकार रोकने का कार्य करती है 


जोधपुर शहर में चर्चित सलमान खान


👉सलमान खान   काले हिरण का शिकार किया था इसलिए बिश्नोई समाज ने सलमान खान पर राजस्थान के उच्च न्यायालय में किस किया था आप लोग जा नहीं सकते हैं एक-एक बिश्नोई समाज के पौधों पर्यावरण के लिए कितना ताकतवर है जैसे सलमान खान जैसे बड़े हस्ती को भी 4 दिन के लिए जेल में डाला गया था


उन महान बलिदान सभी व्यक्तियों को मेरा अभाव रुप से नमन जिन्होंने पर्यावरण की रक्षा के लिए अपना बलिदान भी निछावर कर दिया




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