हर्डल दौड़ | हर्डल दौड़ क्या है | what is hardal running

हर्डल दौड़

⏩हर्डल दौड़ में तीन प्रकार की दौड़े सम्मिलित करते हैं

हर्डल दौड़


1–100 मीटर हर्डल

2–400 मीटर हर्डल

3–200 मीटर हर्डल

🔷110 मीटर हरडल—इसमें 10 हरडल होती हैं। पहली हरडल दौड़ आरम्भ होने वाले स्थान से 13.72 मीटर दूर होती है। बाकी हरडल के मध्य 9.11 मीटर की दूरी होती है। अन्तिम हरडल 14.02 मीटर होती है।

🔷200 मीटर हरडल—यह ट्रैक के विंग से शुरू होती है। इसमें 10 हरडल होती हैं। स्टारटिंग रेखा से पहली हरडल की दूरी 18.29 मीटर तथा अन्तिम हरडल की दूरी 17.10 मीटर होती है।

🔷400 मीटर हरडल– इसमें ट्रैक 100 मीटर का पूर्ण सर्कल के करव (विंग) और दो सीधे करव दिए जाते हैं, इसमें भी 10 हरडल होते हैं। पहली हरडल स्टारटिंग रेखा से 45 मीटर की दूरी पर और बाकी हरडलों की परस्पर दूरी 35 मीटर और अन्तिम हरडल की दूरी 45 मीटर होती है।

💠फर्राटा दौड़ को खिलाड़ियों के कद के अनुसार तीन प्रकार से शुरू किया जाता है।

1.बच स्टार्ट
2.मिडियम स्टार्ट
3. एलोगेटिडस स्टार्ट



🔷रिले दौड़-आरम्भिक रेखा पर अपनी लेन (वीथि) के सिरे पर भाग लेने वाले अपने नायक के पीछे खड़े हो जाते हैं। अनुमति मिलने पर प्रत्येक टोली का पहला छात्र अन्तिम रेखा तक जाता है और वापसी में अगले खिलाड़ी को स्पर्श करके अपने समूह के पीछे खड़ा हो जाता है जिसे वह हाथ लगाता है। वह अन्तिम रेखा तक जाता है और लौट कर अगले खिलाड़ी को स्पर्श करता है। इस प्रकार दौड़ चलती रहती है जब तक कि सभी खिलाड़ी भाग न ले लें। जिस समूह का खिलाड़ी वापस आकर आरम्भिक रेखा पर सर्वप्रथम पहुंच जाता है, वह समूह विजेता होता है।

💠रिले दौड़ के निर्देश

1. प्रत्येक समूह में समान आकार तथा समान संख्या में भाग लेने वाले सम्मिलित हों।

2. समूह में स्थान पर्ची द्वारा निश्चित् किए जाते हैं ।

3. दौड़ का डण्डा खोखला होता है। इसकी लम्बाई एक फुट से अधिक नहीं होती। इसकी परिधि 4½ इंच से कम तथा इसका भार 1½ औंस से कम नहीं होता।

4. 400 गज तक की दौड़ गोल मार्ग पर दौड़ी जाती है। यदि हो सके तो प्रत्येक समूह के लिए पृथक् पृथक् वीथि हो ।

5. पहला धावक (रनर) बाएँ हाथ से डण्डा पकड़कर प्रतीक्षा कर रहे धावक को दाएँ हाथ में देता है। । शीघ्र ही वह इसे अपने बाएं हाथ में पकड़ लेता है। आगे भी इसी प्रकार डण्डा बदला जाता है। प्रत्येक धावक अपने बाएं हाथ में डंडा पकड़कर अगले धावक को दाएं हाथ में देता है। अगला धावक इसे अपने दाएं हाथ में पकड़ लेता है। इसी प्रकार सम्पूर्ण दौड़ में डंडा बदलते है।

मैदान का चित्र


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