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खो-खो


खो-खो खेल का इतिहास


⏩हमारे ही देश में प्रचलित खेल है। यह खेल आमतौर पर गांव अथवा देहातों में अधिक खेला जाता है। इस खेल में उम्र, लिंग या परिधान का कोई विधान नहीं है। लड़के, लड़कियां, पुरूष, स्त्रिया यानि पूरे परिवार के लोग इस खेल का आनन्द उठा सकते हैं।

भारत में प्रथम 'खो-खो' प्रतियोगिता 1914 ई. में दक्कन जिमखाना पुणे के तत्वावधान में हुई थी। 1955 ई. 'भारतीय खो-खो संघ' (K.K.F.I.) की स्थापना महाराष्ट्र में हुई। यह संघ राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्री स्तर पर खो-खो प्रतियोगिता का आयोजन कराता है। पहली राष्ट्रीय खो-खो प्रतियोगिता 1959 में विजयवाड़ा में आयोजित हुई। यह संघ राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खो-खो प्रतियोगिताओं का आयोजन कराता है। कोलकाता में 1987 के दक्षिण एशियाई महासंघ (सैफ) खेलों में प्रदर्शन खेल के रूप में खो-खो को शामिल किया गया। इन्हीं खेलों के दौरान 'एशियाई खो-खो संघ' की स्थापना हुई।

खो-खो खेल का मैदान

(Play Ground of the Game)

खो-खो के खेल को खेलने के लिए एक आयताकार मैदान की आवश्यकता होती है, इस मैदान की लम्बाई 27 मीटर तथा चौड़ाई 15 मीटर होती है। दोनों किनारों पर एक-एक अन्त बना होता है जो 16 मीटर लम्बा तथा 2.70 मीटर चौड़ा होता है। मैदान के दोनों किनारों पर एक-एक पोल लगा हुआ होता है जो भूमि से 120 सेंटी मीटर ऊंचे होते हैं। मैदान के ठीक बीच में एक गली बनाई जाती है यह गली 21.60 मीटर लंबी व 30 सेंटी मीटर चौड़ी होती है। इस गली में आठ बराबर-बराबर इलाके बनाए जाते हैं, यह भाग वर्गाकार में होते हैं, इसकी लम्बाई व चौड़ाई 12 इंच x 12 इंच होती है।

⏩खेल में खिलाड़ियों की संख्या व प्रारम्भ करना खो-खो का खेल दो टीमों के बीच में खेला जाता है। प्रत्येक टीम में 9 खिलाड़ी होते हैं तथा 3 खिलाड़ी सब्स्टीट्यूट के रूप में होते हैं। इस खेल का प्रत्येक मैच चार पारियों का होता है। प्रत्येक पारी 7 मीटर की होती है। प्रत्येक टीम दो पारियों में बैठती है तथा दो पारियों में दौड़ लगती है। बैठने वाली टीम के खिलाड़ी "मेजर" कहलाते हैं तथा दौड़ने वाली टीम के खिलाड़ियों को "रनर" कहा जाता है। खेलने से पहले "रनर" क्रमानुसार अपना नाम "स्कोरर" के पास लिखवाते हैं तथा आरम्भ में तीन खिलाड़ी सीमा के अंदर रहते हैं। इन तीनों खिलाड़ियों के आउट होने पर दूसरे तीन खिलाड़ी अन्दर आते हैं और खेलते हैं।

⏩बैठे हुए खिलाड़ियों (मेजर्स) में से नौवां खिलाड़ी रनर्स को पकड़ने के लिए खड़ा होता है तथा खेल का प्रारंभ करता है। वह नियमानुसार दौड़ते हुए खिलाड़ियों को पकड़ने का प्रयत्न करता है तथा बैठे हुए खिलाड़ियों में से किसी को भी "खो" देता है। "खो" मिलते ही वह खिलाड़ी रनर्स को उठकर पकड़ता है तथा उसका स्थान पहले वाला खिलाड़ी ले लेता है। मैजर पक्ष को एक "रनर" के आउट करने पर एक अंक दिया जाता है। सभी रनर्स के समय से पहले आउट होने पर एक "लीना" दिया जाता है। पारी समाप्त होने तक खेल इसी प्रकार चलता रहता है। खेल के अंत में सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है।

खो-खो महत्वपूर्ण व आवश्यक तथ्य

1. खो-खो के मैदान की लंबाई - 27 मीटर

2.   मैदान की चौड़ाई 15 मीटर

3. मैदान के अंत मे दो आयताकारों का माप (15 मीटर 2.70 मीटर)

4. क्रांस लेन की लम्बाई 15 मीटर

5. क्रॉस लेन की चौड़ाई - 30 सेंटीमीटर

6. (क्रॉस लेन) की संख्या - 8 (आठ)

7. केन्द्रीय गली द्वारा विभाजित प्रत्येक भाग की चौड़ाई - 7.35 मीटर

8. प्रत्येक भाग की लम्बाई - 2.10 मीटर

9. मैच में पारी - 4 (चार)

10. प्रत्येक पारी का समय - 7 मिनट

11. प्रत्येक टीम में खिलाड़ियों की संख्या - 9 (नौ) 3 अतिरिक्त

मैट्रिक प्रणाली में माप (खो-खो)

29 मी = 95.12 फुट 2.50 मी = 8.2 फुट

16 मी = 52.48 फुट 1.2 मी = 3.93 फुट

23.50 मी = 77.08 फुट 2.75 मी = 9.02 फुट

7.85 मी = 25.74 फुट 2.30 मी = 7.54 फुट

खो-खो खेल में नियुक्त अधिकारी

⏩खेल को सुचारू रूप से सम्पन्न कराने के लिए कुछ अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है। ये अधिकारी है

खो-खो खेल के अम्पायर - खो-खो के खेल में दो अम्पायर नियुक्त किए जाते है। इनमें से प्रत्येक अम्पायर केन्द्रीय गली द्वारा विभाजित अपने स्थान में खेल का सूक्ष्मतम निरीक्षण करता है। अर्द्धक क्षेत्र के सभी निर्णय उस अर्द्धक में नियुक्त अम्पायर देगा।

रैफरी इस खेल में एक रैफरी नियुक्त होता है, जो निम्नलिखित कार्य करता है -

नियमों का उल्लंघन करने वाले अथवा खेल में दुर्व्यवहार करने वाले खिलाड़ियो को दण्डित करने का कार्य। अम्पायरों के मध्य मतभेद होने पर अपना निर्णय देना। पारी के अंत में टीमों के अंकों और परिणामों की घोषणा करना।

स्कोरर खेल में नियुक्त स्कोरर निम्नलिखित कार्य करता है -


स्कोरर खिलाड़ी के निश्चित क्रम से मैदान में उतरने का ध्यान

रखता है।

आऊट हुए रनरों का रिकॉर्ड स्कोरर ही रखता है। स्कोरर पारी के अन्त में स्कोर-शीट पर अंक दर्ज करता है। और चेजरों का स्कोर तैयार करता है।

खेल के अंत में परिणाम तैयार करने का कार्य स्कोरर ही करता है और रैफरी को सुनाने के लिए देता है।

टाईम-कीपर- टाईम-कीपर का कार्य खेल के समय का रिकार्ड रखना है। टाईम-कीपर ही पारी के आरंभ या समाप्ति के समय की घोषणा करता है।

खो-खो खेल की मूल कलाएँ निम्नलिखित है -पोल, ड्राईव, खो देना, पोल से घुमना, चैन बनाना, वृत्त बनाना आदि।



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