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कब्बडी खेल का मैदान | कब्बडी खेल का जनक कोनसा देश हे | कब्बडी खेल में कितने खिलाड़ी होते | kabaddi ka medan

 



कब्बडी खेल का जनक कोनसा देश हे –  एक प्राचीन खेल है जो भारत और इसके आस-पास के क्षेत्रों में प्रागैतिहासिक काल से प्रचलित है। कबड्डी का उद्भव भारत से ही माना जाता है। इस खेल को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है।
हनुमान व्यायाम प्रसारक मण्डल (H.V.P.M.) ने कबड्डी को सबसे पहले 1936 के बर्लिन ओलम्पिक में प्रदर्शित किया। सन् 1952 में भारतीय कबड्डी संघ की स्थापना की गई। पुरूषों की प्रथम राष्ट्रीय प्रतियोगिता सन् 1952 में मद्रास में आयोजित की गई। 1990, 1994, 1998, 2002 व 2006 तक के सभी एशियाई खेलों में कबड्डी का स्वर्ण पदक भारत देश ने जीता।

कब्बडी खेल का मैदान खेलने के लिए बड़े मैदान की आवश्यकता नहीं होती है। यहां आम तौर पर पुरुषों के कबड्डी के खेल के लिए 2½ मीटर लम्बा और 10 मीटर चौड़ा मैदान उपयुक्त रहता है। महिलाओं तथा जूनियर्स के लिए 11 मीटर लम्बा तथा 8 मीटर चौड़ा मैदान काफी होता है। मैदान साफ तथा समतल होना चाहिए तथा इस पर मिट्टी, खाद या फिर बुरादा डालकर ऐसा बना लेना चाहिए जिससे कि किसी खिलाड़ी के गिरने पर उसके चोट न लगे।

मैदान को मध्य में से एक केन्द्रीय रेखा के द्वारा दो भागों में विभाजित किया जाता है तथा इसके दोनों ओर एक-एक मीटर की चौड़ी एक पट्टी होती है, जिसे "लॉबी" कहा जाता है

प्रत्येक क्षेत्र (पाले) में केन्द्रीय रेखा से तीन मीटर की दूरी पर एक-एक "बॉक रेखा" खींची जाती है । इससे एक-एक मीटर की दूरी पर “बोनस रेखा" खींची जाती है । साइड रेखा तथा अंत रेखा के बाहर की ओर 4 मीटर का स्थान खुला छोड़ा जाता है तथा अन्त रेखा से दो मीटर की दूरी पर बैठने की जगह बनाई जाती है ।

कबड्डी के टूर्नामेंट

कबड्डी के टूर्नामेंट दो प्रकार के होते है -

⏩कबड्डी लीग - लीग टूर्नामेंट में भाग लेने वाली टीम पराजित होने के बाद भी अपने सारे मैच खेलती है। जीतने वाली टीम को दो अंक और पराजित टीम को शून्य अंक दिया जाता है। यदि मैच बराबर रहे तो दोनों टीमों को एक-एक अंक दिया जाता है । 

⏩2–नाक आऊट नाकआऊट टूर्नाभेंट में कोई टीम यदि हार जाती है तो वह टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाती है।

कब्बडी खेल की अवधी  - पुरूषों के लिए इस खेल की कुल अवधि 40 मिनट (20-20 मिनट की दो अवधि) होती है। इसके विपरीत स्त्रियों के लिए 15-15 मिनट की दो अवधियां निर्धारित की जाती है। दोनों के लिए ही मध्यान्तर का समय पांच मिनट होता है जो प्रथम अवधि के पश्चात् दिया जाता है।

लोना- यदि किसी टीम के सभी खिलाड़ी आऊट हो जाएं तो इस स्थिति को लोना कहते है। लोना की स्थिति में विपक्षी टीम को दो अंक दिए जाते है।

कब्बडी खेल का आरंभ – रैफरी दोनों टीमों में कप्तानों के मध्य टॉस - करवाकर खेल आरंभ करवाता है। टॉस जीतने वाला कप्तान पहले आक्रमण का अवसर अथवा अपनी प्रसन्द का क्षेत्र चुन सकता है। इनमें । से शेष का चुनाव विपक्षी टीम करती है।

कब्बडी खेल में नियुक्त अधिकारी –  के खेल में एक रैफरी, दो अम्पायर दो रेखा निरीक्षक और एक स्कोरर नियुक्त किया जाता है। ये अधिकारी खेल सम्बंधी कार्यों को सुगमता से सम्पन्न कराते हैं।

कब्बडी खेल में कितने खिलाड़ी होते – खिलाड़ी प्रत्येक टीम में कुल 12 खिलाड़ी होते है। इनमें से - सात खिलाड़ी खेल में भाग लेते है और शेष पांच स्थानापन्न खिलाड़ी होते है। टीम का एक कप्तान होता है जो आवश्यकता पड़ने पर टाईम आऊट पुकारता है।

कब्बडी खेल के कपड़े केसे होते  - कबड्डी खेलते समय प्राय: ऐसी पोशाक पहनी जाती है जो शरीर के लिए आरामदायक हो तथा भागते व दौड़ते समय खिलाड़ी को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इस खेल को खेलते समय सामान्यतया आधी बाजू की टी-शर्ट और नेकर पहनी जाती है। महिलाएँ आधी बाजू की टी-शर्ट तथा स्कर्ट अथवा नेकर पहन कर ही खेलती हैं। कबड्डी का खेल खेलते समय ऐसी वस्तुएँ शरीर पर नहीं पहननी चाहिए जिनसे किसी भी प्रकार की चोट लगने का भय हो। उदाहरण के लिए अंगूठी, सेफ्टीपिन, गले की जंजीर आदि नहीं पहननी चाहिए।

कब्बडी खेल में मापन एवम नियम  -

⏩यह खेल आयताकार मैदान में खेला जाता है। एक खिलाड़ी विरोधी पाले (क्षेत्र) में कबड्डी कबड्डी या हु-तू-तू दोहराता जाता है और विरोधी दल के खिलाड़ियों को छूकर आऊट करने की कोशिश करता है ।

इस खेल की याद रखने योग्य बातें निम्नलिखित है - पुरूषों के लिए कबड्डी का मैदान 12.5 × 13 मीटर महिलाओं या जूनियर्स का मैदान - 11 × 8 मीटर प्रकोष्ठ (लॉबी) की चौड़ाई 1 मीटर स्पर्श रेखाओं से केन्द्रीय रेखा की दूरी - 3.25 मीटर



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