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उपनिषद | उपनिषद क्या है | उपनिषद कितने हैं | upnishad kitne hai | what is upnishad | which number upnishad

upnishad kitne hain – 108 उपनिषद है
Upnishad 108 hai pure

108 उपनिषद ये के नाम :

1.ईश = शुक्ल यजुर्वेद, मुख्य उपनिषद्

2.केन = साम वेद, मुख्य उपनिषद्3

.कठ = कृष्ण यजुर्वेद, मुख्य उपनिषद्

4.प्रश्न = अथर्व वेद, मुख्य उपनिषद्

5.मुण्डक = अथर्व वेद, मुख्य उपनिषद्

6.माण्डुक्य = अथर्व वेद, मुख्य उपनिषद्
7.तैत्तिरीय = कृष्ण यजुर्वेद, मुख्य उपनिषद्
8.ऐतरेय = ऋग् वेद, मुख्य उपनिषद्
9.छान्दोग्य = साम वेद, मुख्य उपनिषद्
10.बृहदारण्यक = शुक्ल यजुर्वेद, मुख्य उपनिषद्
11.ब्रह्म = कृष्ण यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
12.कैवल्य = कृष्ण यजुर्वेद, शैव उपनिषद्
13.जाबाल(यजुर्वेद) = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास ओ
15.हंस = शुक्ल यजुर्वेद, योग उपनिषद्
16.आरुणेय = साम वेद, संन्यास उपनिषद्
17.गर्भ = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
18.नारायण = कृष्ण यजुर्वेद, वैष्णव उपनिषद्
19.परमहंस = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
20.अमृत-बिन्दु = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
21,अमृत-नाद= कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्

22,अथर्व-शिर = अथर्व वेद, शैव उपनिषद्
23,अथर्व-शिख = अथर्व वेद, शैव उपनिषद्
24,मैत्रायणि = साम वेद, सामान्य उपनिषद्
25,कौषीताकि = ऋग् वेद, सामान्य उपनिषद्
26बृहज्जाबाल = अथर्व वेद, शैव उपनिषद्
27,नृसिंहतापनी = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
कालाग्निरुद्र = कृष्ण यजुर्वेद, शैव उपनिषद्
मैत्रेयि = साम वेद, संन्यास उपनिषद्
सुबाल = शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
क्षुरिक = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
मान्त्रिक = शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
सर्व-सार = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
निरालम्ब = शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
शुक-रहस्य = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
वज्र-सूचि = साम वेद, सामान्य उपनिषद्
तेजो-बिन्दु = कृष्ण यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
नाद-बिन्दु = ऋग् वेद, योग उपनिषद्
ध्यानबिन्दु = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
ब्रह्मविद्या = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
योगतत्त्व = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
आत्मबोध = ऋग् वेद, सामान्य उपनिषद्
परिव्रात् (नारदपरिव्राजक) = अथर्व वेद, संन्यास उपनिषद्
त्रि-षिखि = शुक्ल यजुर्वेद, योग उपनिषद्
सीता = अथर्व वेद, शाक्त उपनिषद्
योगचूडामणि = साम वेद, योग उपनिषद्
निर्वाण = ऋग् वेद, संन्यास उपनिषद्
मण्डलब्राह्मण = शुक्ल यजुर्वेद, योग उपनिषद्
दक्षिणामूर्ति = कृष्ण यजुर्वेद, शैव उपनिषद्
शरभ = अथर्व वेद, शैव उपनिषद्
स्कन्द (त्रिपाड्विभूटि) = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
महानारायण = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
अद्वयतारक = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
रामरहस्य = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
रामतापणि = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
वासुदेव = साम वेद, वैष्णव उपनिषद्
मुद्गल = ऋग् वेद, सामान्य उपनिषद्
शाण्डिल्य = अथर्व वेद, योग उपनिषद्
पैंगल = शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
भिक्षुक = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
महत् = साम वेद, सामान्य उपनिषद्
शारीरक = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
योगशिखा = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
तुरीयातीत = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
संन्यास = साम वेद, संन्यास उपनिषद्
परमहंस-परिव्राजक = अथर्व वेद, संन्यास उपनिषद्
अक्षमालिक = ऋग् वेद, शैव उपनिषद्
अव्यक्त = साम वेद, वैष्णव उपनिषद्
एकाक्षर = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
अन्नपूर्ण = अथर्व वेद, शाक्त उपनिषद्
सूर्य = अथर्व वेद, सामान्य उपनिषद्
अक्षि = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
अध्यात्मा = शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
कुण्डिक = साम वेद, संन्यास उपनिषद्
सावित्रि = साम वेद, सामान्य उपनिषद्
आत्मा = अथर्व वेद, सामान्य उपनिषद्
पाशुपत = अथर्व वेद, योग उपनिषद्
परब्रह्म = अथर्व वेद, संन्यास उपनिषद्
अवधूत = कृष्ण यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
त्रिपुरातपनि = अथर्व वेद, शाक्त उपनिषद्
देवि = अथर्व वेद, शाक्त उपनिषद्
त्रिपुर = ऋग् वेद, शाक्त उपनिषद्
कठरुद्र = कृष्ण यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
भावन = अथर्व वेद, शाक्त उपनिषद्
रुद्र-हृदय = कृष्ण यजुर्वेद, शैव उपनिषद्
योग-कुण्डलिनि = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
भस्म = अथर्व वेद, शैव उपनिषद्
रुद्राक्ष = साम वेद, शैव उपनिषद्
गणपति = अथर्व वेद, शैव उपनिषद्
दर्शन = साम वेद, योग उपनिषद्
तारसार = शुक्ल यजुर्वेद, वैष्णव उपनिषद्
महावाक्य = अथर्व वेद, योग उपनिषद्
पञ्च-ब्रह्म = कृष्ण यजुर्वेद, शैव उपनिषद्
प्राणाग्नि-होत्र = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
गोपाल-तपणि = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
कृष्ण = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
याज्ञवल्क्य = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
वराह = कृष्ण यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
शात्यायनि = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
हयग्रीव = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
दत्तात्रेय = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
गारुड = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
कलि-सण्टारण = कृष्ण यजुर्वेद, वैष्णव उपनिषद्
जाबाल(सामवेद) = साम वेद, शैव उपनिषद्
सौभाग्य = ऋग् वेद, शाक्त उपनिषद्
सरस्वती-रहस्य = कृष्ण यजुर्वेद, शाक्त उपनिषद्
बह्वृच = ऋग् वेद, शाक्त उपनिषद्
108.मुक्तिक = शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्

upnishad kitne hain

⏺️उपनिषद-👉उपनिषदों में ब्रह्म-ज्ञान अथवा आत्म-ज्ञान की  विवेचना की गई है। इनमें जीव, जगत, ब्रह्म, मोक्ष प्राप्ति आदि का विवेचन किया गया है। उपनिषद आर्यों के दर्शन के मूलाधार हैं। इनमें यज्ञों के स्थान पर ज्ञान मार्ग का तथा बहुदेववाद के स्थान पर एक परम सत्ता का प्रतिपादन किया गया है। इनमें ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, श्वेताश्वतर और कौषीतकि नामक उपनिपद उल्लेखनीय हैं। इनसे आर्यों के धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक जीवन की जानकारी मिलती है।



⏺️सूत्र साहित्य-👉इसके निम्नलिखित तीन भाग हैं-
श्रौत सूत्र-इनमें यज्ञों से सम्बन्धित अनुष्ठान एवं कर्मकाण्डों का विवेचन मिलता है।

⏺️गृह्य सूत्र-👉इनमें गृहस्थ जीवन से सम्बन्धित संस्कारों, अनुष्ठानों तथा मौलिक कर्तव्यों का वर्णन है।
२ धर्म सूत्र-इनमें वर्णाश्रम, पारिवारिक जीवन, राजनीतिक जीवन, दण्ड-व्यवस्था आदि का विवेचन किया गया है।

⏺️वेदांग-👉वेदों को समझाने के लिए वेदांगों की रचना की गई।वेदांग 6 हैं-
(1) शिक्षा,
 (ii) कल्प, 
(iii) निरुक्त, 
(iv) व्याकरण,
(v) छन्द तथा 
(vi) ज्योतिष।

⏺️ स्मृतियाँ-👉स्मृतियों में मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन के विविध कार्यों के नियमों एवं निषेधों का वर्णन मिलता है। स्मृतियों से प्राचीन भारत के सामाजिक एवं धार्मिक इतिहास की पर्याप्त जानकारी मिलती है। मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति, नारद स्मृति, बृहस्पति स्मृति, कात्यायन स्मृति, पाराशर स्मृति आदि प्रमुख स्मृतियाँ हैं।

⏺️महाकाव्य-👉रामायण तथा महाभारत प्राचीन भारत के महाकाव्य हैं। रामायण के रचयिता वाल्मीकि तथा महाभारत के रचयिता वेदव्यास थे। इन महाकाव्यों से भारत के सांस्कृतिक इतिहास पर अच्छा प्रकाश पड़ता है। इन महाकाव्यों से तत्कालीन भारत की सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति के बारे में पर्याप्त जानकारी मिलती है।

⏺️पुराण-👉पुराणों की संख्या 18 है। इन ग्रन्थों में महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक सामग्री है। पुराणों में पाँच विषयों का वर्णन है-(1) सृष्टि को उत्पत्ति किस प्रकार हुई,
 (2) सृष्टि का प्रलय किस प्रकार होता है,
 (3) देवताओं तथा ऋषियों की वंश तालिका का वर्णन, 
(4) काल के विविध मन्वन्तरों (महायुगों) का वर्णन तथा 
(5) प्राचीन राजवंशों का क्रमिक इतिहास । विष्णु पुराण' में मौर्य वंश, 'मत्स्य पुराण' में आन्ध्र वंश तथा 'वायु पुराण' में गुप्त वंश के विषय में पर्याप्त विवरण मिलता है। यद्यपि पुराणों में कुछ त्रुटियाँ हैं, किन्तु फिर भी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोणों से पुराणों का काफी महत्त्व है। प्राचीन भारत का सांस्कृतिक इतिहास लिखने के लिए पुण्ण बहुत उपयोगी हैं।

 

👇 इन सब टैग्स के बारे में हमारी पोस्ट में बताया गया है 
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उपनिषद कितने होते हैं
108 उपनिषद के नाम हमारी पोस्ट में बताया है 

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