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Numerical change found in chromosome

गुणसूत्र में पाए जाने वाले संख्यात्मक परिवर्तन

 (1) haploidy = Under this, there is a change in the group of chromosomes in the somatic cell, that is, the group of haploid chromosome found in the multiple is called haploidy.


 There are three types of goodness
 1.Agunita
 2. double quality
 3. Multiplicity



 (1.) Haploidy = In this type of chromosomal development, a group of chromosomes or a gene is present, it is called haploid


 (2) Diploidy = In this type of chromosomal development, two groups of chromosomes are found, it is called diploidy.


 (3) Polyploidy = In this type of chromosome addition, extra chromosomes in animals become inlersex due to which are extraneous, in which chromosome groups are in even number because when chromosome groups are in odd number then very few

  It is of three types
 1.Self Multiplicity
 2. At Multi Quality
 3.Sectional but Multi-Quality

 (1) Self-multiplicity = Under this group of chromosomes or xenons are found in many stages

 (2) But polyploidy = In this type of chromosomal change, in F1 hybridization, chromosomes from two different species are found in many stages but the number of chromosomes is different in both the groups.

 (3) Polyploidy on segmental = Action of segment pair with some of the chromosomes from the group of chromosomes, it is called polyploidy on segmental, it is the type between self polyploidy and but polyploidy

  importance of multiplicity

 1. Due to this, the size of the pollen grains and guard cells of the leaves increases

 2. Due to multiplicity, the rate of division decreases in plants, due to which the rate of respiration decreases

 3. Due to the multiplicity, proteins are found in more quantity in the cells
 
 (2) haploidy = In this type of chromosomal change, when there is an increase in the number of two chromosomes in a set of diploid chromosomes in a gene, then it is called haploidy.

 it is of two types
 1. Hypoploidy
 2. Hyperploidy 


 1. Hypoploidy = When one or more chromosomes are reduced from a diploid set of chromosomes, then it is called hypoploidy.
 it is of two types
 (1) A low chromosomal = if one chromosome is missing from the diploid state, then it is called a low chromosomal
 (2) Double chromosomal = When one homologous chromosome group is absent from the diploid group I of chromosomes, it is called double chromosomal.


 2. Hyperploidy = When there is an increase in the number of chromosomes from one or more of the diploid chromosomes in a gene, it is called hyperploidy.
 it has two types
 (1) Trisomy = In this type of chromosomal change, an extra chromosome is found in living things, it is called trisomy.
 (2) Tetrasomy is an extra number of 2 chromosomes present in the diploid set of chromosomes.
गुणसूत्र में पाए जाने वाले संख्यात्मक परिवर्तन 


(1) सुगुणिता = इसके अंतर्गत कायिक कोशिका में गुणसूत्रो के समूह में परिवर्तन होता है अर्थात अगुणित गुणसूत्र के समूह का गुणज में पाया जाना सुगुणीता कहलाता है


सुगुणिता तीन प्रकार के होते है 
1.अगुनिता
2. द्वि गुणिता
3. बहुगुणिता


(1.) अगुणिता= इस प्रकार के गुणसूत्रीय परीवर्धन में गुणसूत्रों का एक समूह या एक जिनोंनउपस्थित होताहैं उसे अगुणी ता कहते हैं


(2) द्वि गुणीता= इस प्रकार के गुण सूत्रीय परिवर्धन मैं गुणसूत्रों के दो समूह पाय जाते हैं उसे द्विगुणिता कहते हैं 


(3)बहुगुणीता =इस प्रकार के गुणसूत्र परिवर्धन में प्राणियों में अतिरिक्त गुणसूत्रों के कारण inlersex बन जाते हैं जो बाह्य होते हैं इनमें गुणसूत्र के समूह सम संख्या में होते हैं क्योंकि जब गुणसूत्र के समूह विषम संख्या में होते हैं तो बहुत कम हो जाते हैं

 यह तीन प्रकार के होते हैं 
1.स्व बहु गुणीता 
2.पर बहु गुणीता 
3.खंडीयपर बहु गुणीता

(1) स्व बहु गुणीता =इसके अंतर्गत गुणसूत्रों के समूह या जिनॉन बहुत सारी अवस्था में पाए जाते हैं 

(2) पर बहु गुणीता =इस प्रकार के गुण सूत्रीय परिवर्तन में F1 संकरण में दो अलग-अलग प्रजाति से आए हुए गुणसूत्रों के बहुत सारी अवस्था में पाए जाते हैं लेकिन दोनों समूह में गुणसूत्रों की संख्या अलग-अलग होती हैं 

(3) खंडीय पर बहु गुणीता = गुणसूत्रों के समूह में से कुछ गुणसूत्रों से खंड युग्म की क्रिया होती है इसे खंडीय पर बहु गुणीता कहते हैं यह स्व बहु गुणीता एवं पर बहु गुणीता के मध्य के प्रकार होते हैं

 बहुगुनीता का महत्व

1. इसके कारण पत्तियों का आकार परागकण तथा रक्षक कोशिकाओं का आकार बढ़ जाता है

2. बहु गुनीता के कारण पादपों में विभाजन की दर कम हो जाती है इसके कारण स्वसन की दर कम हो जाती है 

3 .बहु गुणीता के कारण कोशिकाओं में प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है
 
(2) असुगुणीता= इस प्रकार के गुण सूत्रीय परिवर्तन में जब किसी जीन में द्वि गुणित गुणसूत्रों के समूह में से एक या दो गुणसूत्रों की संख्या में कमियां वृद्धि हो जाए तो उसे असुगुणीता कहते हैं 

यह दो प्रकार के होते है 
1. hypoploidy
2. Hyperploidy

1. Hypoploidy =जब गुणसूत्रों के द्विगुणित समूह में से एक या एक से अधिक गुणसूत्र कम हो जाए तो hypoploidy कहते हैं 
यह दो प्रकार के होते हैं 
(1) एक न्यून सुत्रता = यदि द्वि गुणित अवस्था में से एक क्रोमोसोम कम हो जाए तो उसे एक न्यून सूत्रता कहते है 
(2) द्वि न्यून सूत्रता = जब गुणसूत्रों के द्विगुणित समूह मैं से एक समजात गुणसूत्र का समूह अनुपस्थित हो तो उसे द्वि न्यून सूत्रता कहते हैं


2. Hyperploidy= जब किसी जीन में द्वि गुणीत गुणसूत्रों में से एक या एक से अधिक गुणसूत्रों की संख्या मैं वृद्धि हो जाए तो उसे hyperploidy कहते हैं 
इसके दो प्रकार होते हैं 
(1) Trisomy=इस प्रकार के गुण सूत्रीय परिवर्तन में सजीवों में एक अतिरिक्त गुणसूत्र पाया जाता है इसे trisomy कहते हैं 
(2)Tetrasomyइसमें गुणसूत्रों के द्विगुणित समूह में 2 गुणसूत्र अतिरिक्त संख्या में उपस्थित होते हैं

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