Linkage(सहलग्नता)types of Linkage(सहलग्नता के प्रकार) | single linkage | gene linkage | flux linkage

Linkage सहलग्नता
• Linkage = the passing of genes located on the same chromosome from one generation to another together is called linkage and
  The process of maintaining the union of the parent cell with its daughter cell by passing the genes together is called linkage.
 •Types of Linkage

 (1) Complete linkage = When the linkage genes are inherited in their parental combination for two or more species, then it is called complete linkage. Is
 (2) Incomplete linkage = During meiosis, the process of fragmentation and recombination takes place in homologous chromosomes and at the time of recombination, the exchange of broken parts of the chromatid leads to the formation of new combinations, this whole process is called incomplete linkage.

 • Morgan's hypothesis for linkage = The word linkage is derived from the studies done by Morgan on the Grossophila fly, according to Morgan, the hypothesis given by Bretson and Kunnett, that is, the coupling repulsion hypothesis is two aspects of the same phenomenon. Reason: In the case of alleles, dominant alleles are found on the same chromosome, but in the case of repulsion, both the dominant alleles are found on different homologous chromosomes, i.e. such genes are called attached genes and this stage is called linkage stage.

 • Chromosomal theory of linkage = At ​​the time of inheritance, all genes present on a chromosome tend to be together. Linkage strength is high According to Morgan, pair repulsion hypothesis is two sides of the same phenomenon, so Morgan concluded on the basis of his experiments that it may be possible to make a linkage map of chromosomes of living organisms. More genes are found which form linkage group i.e. the number of head group in each organism is same as that of its haploid chromosome.
 Example.=(1) Humans have 23 haploid chromosomes i.e. 23 linked groups are present.
 (2) Pea has 7 linked groups i.e.
        7 haploid chromosomes are found


 • Importance of linkage =

 (1) Linkage is important in plant and animal because the possibility of miscellaneous events occurring during gamete formation is less.

 (2) Sometimes qualitative traits like leaf shape, stem color and quantitative traits like fruit size, seed weight etc. can be recognized

 (3) They are inherited together due to linkage, so the linkage due to which it is easy for any plant to select that animal, so we can say that linkage has special importance in the selection of plants.





सहलग्नता= एक ही गुणसूत्र पर स्थित जीनों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में साथ-साथ वंशा गत होना सहलग्नता कहलाता हैतथा
 जीनो के द्वारा एक साथ वंशा गत होकर अपनी पुत्री कोशिका में जनक कोशिका के संयोग को बनाए रखने की प्रक्रिया ता सहलग्नता कहलाती है 

सहलग्नता के प्रकार 

(1) पूर्ण सहलग्नता=जब सहलग्नता जीन दो या दो से अधिक पीठीयो तक अपने जनकिय संयोग में वंशा गत होते हैं तो उससे पूर्ण सहलग्नता कहते हैं इस प्रक्रिया में क्रॉसिंग ओवर नहीं होता है तथा नए संयोग नहीं बनते हैं यह अवस्था एक दुर्लभ अवस्था कहलाती है

(2) अपूर्ण सहलग्नता= अर्धसूत्री विभाजन के समय समजात गुणसूत्रों में विखंडन एवं पुनः योजन की प्रक्रिया होती है तथा पुनःयोजन के समय क्रोमेटीड के टुकड़े टूटे हुए भागो का आदान प्रदान होना इससे नए संयोगो का निर्माण होता है इस संपूर्ण प्रक्रिया को अपूर्ण सहलग्नताकहते हैं 

सहलग्नता के लिए मॉर्गन की संकल्पना =सहलग्नता शब्द की उत्पत्ति मॉर्गन के द्वारा किए गए ग्रोसोफिला मक्खी पर किए गए अध्ययनों से हुई है मॉर्गन के अनुसार ही ब्रेटसन व कुनेट ने जो परिकल्पना दी हैं अर्थात युग्मन प्रतिकर्षण परिकल्पना एक ही घटना के दो पहलू हैं इस कारण युग्मन की दशा में प्रभावी युग्म विकल्पी एक ही गुणसूत्र पर पाए जाते हैं लेकिन प्रतिकर्षित की अवस्था में दोनों प्रभावी युग्म विकल्प अलग-अलग समजात गुणसूत्रों पर पाए जाते हैं अर्थात ऐसे जीन को संलग्न जीन कहते हैं तथा इस अवस्था को सहलग्नता अवस्था कहते हैं

सहलग्नता का गुणसूत्रिय सिद्धांत= वंशागती के समय एक गुणसूत्र पर उपस्थित सभी जींद मैं एक साथ रहने की प्रवृत्ति होती है सभी जीन गुणसूत्र पर रेखित क्रम मैं उपस्थित रहते हैं सहलग्न जीन के बीच की दूरी सहलग्नता के सामर्थ के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं पास पास स्थित जिनमें सहलग्नता सामर्थ्य अधिक होती है मोरगन के अनुसार युग्मन प्रतिकर्षण परिकल्पना एक ही घटना के दो पहलू होते हैं अतः मार्गन ने अपने प्रयोगों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि सजीवों के गुणसूत्र का सहलग्नता मानचित्र बनाना संभव हो सकता है मोरगन के अनुसार एक गुणसूत्र पर एक से अधिक जीन पाए जाते हैं जो सहलग्नता समूह बनाते हैंअर्थात प्रत्येक सजीव मैं सर लगना समूह की संख्या उसके अगुणित गुणसूत्र के समान होते हैं 
उदाहरण.=(1) मनुष्य में 23 अगुणित गुणसूत्र होते हैं अर्थात 23 सहलग्न समूह उपस्थित होते हैं
(2) मटर में 7 सहलग्न समूह होते हैं अर्थात 
       7अगुणित गुणसूत्र पाए जाते हैं 


सहलग्नता का महत्व =

(1) पौधे तथा जंतु में सहलग्नता महत्वपूर्ण होता है क्योंकि युग्मक निर्माण के समय होने वाली विविध बताएं की संभावना कम हो जाति है

(2) कभी-कभी गुणात्मक लक्षण जैसे पत्तियों की आकृति तने का रंग तथा मात्रात्मक लक्षण जैसे फल का आकार, बीज का भार आदि साथ साथ सहलग्न होते हैं अर्थात ऐसे पौधों में जब संकरण किया जाता है तो प्राप्त संतति में मात्रात्मक लक्षणों को आसानी से पहचाना जा सकता है

(3) ये सहलग्नता के कारण एक साथ वंशा गत होते हैं अतः सहलग्न जिन के कारण किसी भी पौधे का वह जंतु का चयन करने में आसानी होती है अतः हम कह सकते हैं कि पौधे के चयन में सहलग्नता का विशेष महत्व होता है



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