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जोधपुर में प्रजामंडल आंदोलन | मारवाड़ प्रजामंडल आन्दोलन | Prajamandal movement in Jodhpur


जोधपुर में प्रजामंडल आंदोलन

⏩राज्य में मारवाड़ राजद्रोह अधिनियम (1909) और मारवाड़ प्रेस अधिनियम (1922) लागू थे। सभा, संघ, सार्वजनिक भाषण आदि की राज्य में स्वतंत्रता नहीं थी।
<⏩जोधपुर (मारवाड़) में जन आंदोलन की शुरुआत 1918ई. में हो गयी थी, जब चांदमल सुराणा ने 'मारवाड़ हितकारिणी सभा' की स्थापना की थी। किंतु यह संस्था अधिक सक्रिय नहीं हो सकी। तत्पश्चात 1920 ई. में जयनारायण व्यास ने 'मारवाड़ ने सेवा संघ' का गठन किया।

⏩सर सुखदेव प्रसाद ने कुछ अवसरवादी व्यक्तियों को एक प्रतिद्वन्द्वी संस्था बनाने के लिए प्रेरित किया। परिणामस्वरूप 'राजभक्त देशहितकारिणी सभा' का गठन किया गया। ब्यावर में 'राजस्थान सेवा संघ' के सर्वेसर्वा मणिलाल कोठारी ने उन्हें 'तरुण राजस्थान' का संपादक नियुक्त किया।

⏩1927 ई. में 'अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद' के बम्बई प्रथम अधिवेशन में भाग लेकर जयनारायण व्यास जोधपुर लौट आये।

⏩अक्टूबर, 1929 में जयनारायण व्यास ने 'मारवाड़ राज्य लोक परिषद' (अ.भा.देशी राज्य लोक परिषद की राज्य इकाई) का अधिवेशन जोधपुर में करने की घोषणा की। किंतु जोधपुर प्रशासन ने अधिवेशन आयोजित करने की अनुमति नहीं दी। 'मारवाड़ हितकारिणी सभा' की ओर से दो पुस्तिकाएं - 'मारवाड़ की अवस्था' और 'पोपा बाई की पोल' प्रकाशित की गयी, जिनमें मारवाड़ प्रशासन की कटु आलोचना की गयी।

24-25 नवंबर, 1931 को पुष्कर में चांदकरण शारदा की ⏩अध्यक्षता में 'मारवाड़ राज्य लोक परिषद' का अधिवेशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 1934 ई. में 'जोधपुर प्रजामंडल' की स्थापना की गयी, जिनमें मारवाड़ प्रशासन की कटु आलोचना की गयी।

⏩प्रजामंडल ने एक युवा विधवा श्रीमती कृष्णा के राजपरिवार से जुड़े कुछ लोगों द्वारा अपहरण के मामले को व्यापक स्तर पर उठाया और उसकी रिहाई की मांग करते हुए इस मध्ययुगीन अमानवीय प्रवृत्ति के खिलाफ देश के विभिन्न भागों में रहने वाले मारवाड़ियों से 'कृष्ण दिवस' मनाने का आह्वान किया। जोधपुर राज्य ने जब प्रजामंडल को अवैधानिक संगठन घोषित कर दिया तो उसके कार्यकर्ताओं ने 'नागरिक अधिकार रक्षक समिति' गठित की। इस नए संगठन ने शिक्षा शुल्क के खिलाफ मई-जून 1936 में अभियान चलाया तथा 21 जून, 1936 को 'शिक्षा दिवस' मनाया।

⏩1938ई. में सुभाषचंद्र बोस जोधपुर आये और उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए त्याग और समर्पण करने के लिए प्रेरित किया। अंततः मई 1938 में 'मारवाड़ लोक परिषद' की स्थापना की गयी जिसका उद्देश्य महाराजा की अध्यक्षता में उत्तरदायी शासन स्थापित करना था।

⏩इधर, जोधपुर महाराजा ने राज्य की 'केंद्रीय सलाहाकार परिषद' का पुनर्गठन किया और जयनारायण व्यास को भी इसका सदस्य मनोनीत किया। अप्रैल, 1942 ई. में चण्डावल के ठाकुर ने लोक परिषद के कार्यकर्ताओं को खूब पिटवाया। राज्य सरकार आंदोलनकारियों को जेल में ढूंसती गयी। इस पर व्यासजी सहित 41 सत्याग्रहियों ने जेल में भूख हड़ताल आरंभ कर दी।

⏩19 जून, 1942 को एक भूख हड़ताली कार्यकर्ता बालमुकुन्द बिस्सा, भूख एवं जेल अधिकारियों की यातनाओं से जेल में शहीद हो गये। 26 जुलाई को समूचे राजपूताना में 'मारवाड़ सत्याग्रह दिवस' मनाया गया। यह आंदोलन चल ही रहा था कि देश में 9 अगस्त, 1942 को 'भारत छोड़ो आंदोलन' आरंभ हो गया।

⏩22 सितंबर को गिरदीकोट में हुई आमसभा में सूरजदेवी माथुर तथा सावित्री देवी ने उत्तरदायी सरकार के गीत गाए, आर्य कन्या पाठशाला की मुख्य अध्यापिका ने भाषण दिया।

⏩25 सितंबर को 'दमन विरोध' दिवस मनाया एवं विशाल जुलूस निकाला गया। 1948 में जयनारायण व्यास के नेतृत्व में नया मंत्रिमंडल बनाया गया, जिसमें मथुरादास माथुर और द्वारकादास सम्मिलित थे।

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