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                      दूध संसाधन



=}  (1) पश्च्युरेशन ( निरोगण )

इस शब्द की उत्पत्ति लुइस पाश्चर से हुई है |
इसमें जीवाणु को एक निश्चित ताप पर निश्चित समय तक गर्म करके 99% हानिकारक जीवाणुओं को निष्क्रिय कर दिया जाता है|
इसकी निम्न विधियां हैं
(1) निम्न ताप व दीर्घकाल विधि/धारण विधि /बैचपश्च्युरेशन (low temp.long time)
62 . 8 – 65 डिग्री सेल्सियस  30 मिनट गर्म करके  4 से 5 डिग्री सेल्सियस पर तुरंत ठंडा करते है |
(2) उच्च ताप,अल्पकाल विधि /सतत पश्च्युरेशन ( high temp. Short time)
71.7 डिग्री सेल्सियस पर 15 सेकंड गर्म करके  4 से 5 डिग्री सेल्सियस पर तुरंत ठंडा करते है |
( 3) अति उच्च ताप विधि (ultra high temp.) U H T
135 –150 डिग्री सेल्सियस पर 1–5 सेकंड गर्म करके 4–5 डिग्री सेल्सियस पर ठंडा करते है |

 

=} (2) निर्जलीकरण

सभी हानिकारक एवं लाभदायक जीवाणुओं को नष्ट कर दिया जाता है | इस क्रिया के बाद फिर किण्वन की क्रिया नहीं होती है | तापमान 115 डिग्री से 130 डिग्री सेल्सियस पर 30 मिनट के लिए गर्म किया जाता है ।

=} ( 3) अवसीलन

10 से 12 घंटे 4 डिग्री सेल्सियस पर संग्रहित किया जाता है 
=}( 4)  दूध का समांगीकरण
इसमें दूध की वसा गोलिकाओ को छोटे-छोटे कणों में विभाजित कर दिया जाता है जिससे दूध को संग्रहित करते समय वसा की परत नहीं आ सके व पूरे दूध में समान रूप से उपस्थित रहे।
मशीन = होमोजीनाइजर
मशीन का दबाव = 2000 से 2500 पोड़/ वर्ग इंच


                           दुग्ध उत्पाद


=} ( 1) घी उत्पादन

यह देसी मक्खन के द्वारा या क्रीम के द्वारा शुद्ध रूप से तैयार किया जाता है । जिस में वसा की मात्रा 99 – 99.5% होती है
यह कमरे के ताप पर द्रव्य का अर्थ ठोस होता है ।
घी में नमी की मात्रा 0.5% से कम होती है |
घी बनाने के लिए आवश्यक तापमान 110 डिग्री से 115 डिग्री सेल्सियस होता है ।


=}(2)  दही उत्पादन

यह दूध को गर्म करके किण्वन  की क्रिया द्वारा प्राप्त उत्पाद है गरम करने के तुरंत बाद इसमें जामन  के रूप में लेक्ट्रिकअम्ल डाला जाता है ।
जामन की मात्रा 1 से 3%।
दही में कैल्शियम की मात्रा 0.12 –0.14 %
फास्फोरस की मात्रा 0.09 – 11%
दही के लिए जामन के रूप में बैक्टीरिया कल्चर निम्न है |
(A) स्ट्रैप्टॉकोक्कस लैपटॉस
(B) लेक्टो बेसिलस बल्गेरिस
( C) लैक्टोबैसिलस एसिडोफिल्स
दही में लेक्टोसकी  मात्रा 4.6 से 5.2 % होती है ।
दही में प्रोटीन की मात्रा 3.2 % से 3.4 %होती है ।
दही में वसा की मात्रा 5 से 8%होती है।
दही में  पानी की मात्रा 85% होती है ।


=} (3) छैना एवं पनीर उत्पादन 

यह दूध का वह उत्पाद है जो गर्म करके तथा सिट्रिक अम्ल व लैक्टिक अम्ल के द्वारा फाड़ कर तैयार किया जाता है ।
सबसे सर्वोत्तम प्रकार का छेना बनाने के लिए गाय का दूध प्रयोग किया जाता है ।

                           छैने का संगठन

अवयव                    भैंस का दूध                      गाय का दूध
निम्मी।                       51%                                 53%
वसा                           29%                                27%
प्रोटीन                       14.4%                              17.4%
लेक्टोज                      2.3%                               2.1

=}  ( 4) खींस उत्पादन

यह मादा पशु के थनों से प्राप्त होने वाला स्त्राव है ।
खीस की  मात्रा बछड़े की जन्म के 1 दिन से लेकर 5 दिन तक मानी जाती है।
यह गर्म करने के कारण फट जाता है ।
इसका उपयोग बछड़े को देने के लिए करते हैं।
बछड़े के शरीर के कुल भाग का 10% भाग खींस पिलाई जाती है ।

=}    खीस का संगठन उत्पादन
भैंस के खीस में वसा=  4.10% होता है ।
गाय के खीस में वसा= 5.10% होता है ।
भैंस के खीस में प्रोटीन=  21.6 % होता है ।
गाय के खीस  में प्रोटीन= 16.42%होता है |


                   दूध निकालने की विधि


=} (1)  हाथ के द्वारा
(A) चुटकी विधि = पशु क्रोधित होता है ।
( B) अंगूठा विधि=  थानों में गांठ बन जाती है।
( C)  पूर्ण हस्त विधि= सर्वोत्तम विधि है।


=}  ( 2) मशीन के द्वारा = बड़े डेयरी फार्म में उपयोग में लेते हैं इसमें समय कम लगता है। स्वच्छ दूध उत्पादन होता है।


               दूध की गुणवत्ता एवं परीक्षण


=} चबूतरे के परीक्षा= दूध फैक्ट्री पर संसाधित करने से पूर्व उसकी शुद्धता व ताजे पन की जांच की जाती है।
(1)  ज्ञानेंद्रीय 
(2) C.O.B.
( 3) अम्लता परीक्षण
(4) अपेक्षित घनत्व
(5) वसा परीक्षण


(1)  ज्ञानेंद्रिय परीक्षण = (1) देखकर (2) सूंघकर (3) स्वाद


(2) C.O.B. ( clot on boiling test) उबालने पर फटने का परीक्षण = अम्लता व खीस का पता लगाने हेतु इस विधि का उपयोग करते हैं ।


(3) अमृता परीक्षण
दूध में अमृता दो प्रकार की होती हैं।
(A)  प्राकृतिक अमृता = यह दूध में कैसीन,फास्फेट ,साइट्रेट, CO2 के कारण होती हैं ।
प्राकृतिक अमृता = 0.14 –0.16
(B)  विकसितअम्लता=  दूध को कुछ समय तक रखने पर उसमें उपस्थित जीवाणु दुग्धम (लेक्टॉज) पर क्रिया करके उसे लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित कर देते हैं ।
विकसित अम्लता= 0.32

 

              दूध में अम्लता ज्ञात करने की विधि

=}} अनुमापन विधि=  इस विधि में 10 ml दूध 1ml फिनोफ्थिलिन सूचक मिलाते हैं NaoH क्षार बूंद बूंद करके डालते हैं जिससे गुलाबी रंग स्थाई हो जाता है।


(4)  आपेक्षिक घनत्व
आपेक्षिक घनत्व को लेक्टोमिटर से मापते है।
यह एक तरह का हाइड्रोमीटर है ।
0 से 40 निशान ऊपर से नीचे की तरफ बने हुए होते हैं।
पानी व सेप्रेटा दूध की मिलावट का पता लगाने हेतु उपयोगी है पानी मिलाने पर आपेक्षिक घनत्व कम व सेप्रेटा मिलावट  पर अपेक्षित घनत्व बढ़ जाता है।
यह आर्किमिडीज के सिद्धांत पर आधारित है ।
       दूध                                      आपेक्षित घनत्व
      बकरी                                     1.025
      गाय                                       1.028– 1.030
     भैंस।                                       1.030–1.032
     भेड़।                                        1.035
   सेप्रेटा/ स्किम्ड दूध                        1.036


=}} (5)वसा परीक्षण
ब्युटेरोमीटर यंत्र तथा गरबर विधि द्वारा वसा  परीक्षण किया जाता है ।इसमें दूध की मात्रा 10.75 ml, 10 ml H2so4,1ml एमाइल एल्कोहल लेते हैं । यह परीक्षण  अपकेंद्रीय बल पर आधारित है।
=}   अन्य परीक्षण
(1) हंसा परीक्षण=  गाय के दूध में भैंस के दूध की मिलावट का पता लगाने हेतुउपयोगी है ।
( 2 ) नाइट्रेट परीक्षण = वर्षा जल की मिलावट का पता लगाने हेतु उपयोगी है ।
( 3) आयोडीन परीक्षण=  दूध में स्टार्च की उपस्थिति का पता लगाने हेतु उपयोगी है।

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