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राजस्थान के लोक नाट्य | राजस्थान के लोक नाट्य pdf | रम्मत ,नौटंकी ,स्वांग , प्रमुख ख्याले , प्रमुख लीलाएं | Folk Natya of Rajasthan | heetzthefly.com

              राजस्थान के लोक नाट्य

  (1) रम्मत 

 क्षेत्र =  जैसलमेर
 जैसलमेर में इसे तेजकवि ने लोकप्रिय किया इसने स्वतंत्र बावनी पुस्तक की रचना की तथा वह पुस्तक गांधीजी को 1942 में भेट किया।
 पाटा संस्कृति की रम्मत =  बीकानेर ( आचार्यों का शोक) की प्रसिद्ध है।
 इस नाट्यकला की शुरुआत रामदेव जी के भजन से होती हैं।
रम्मत इसके प्रमुख कलाकार = फागु महाराज
                                          सुवा महाराज
                                          मनीराम व्यास
                                          तुलसीदास 

  (2) चारबैत

चारबैत मूलतः = अफगानिस्तान ( पश्तो संस्कृति ) 
अर्थ=  घुटनों के बल बैठकर कव्वाली करना।
क्षेत्र = टोंक।
इस में प्रयोग आने वाले वाद्य यंत्र=  ठप/ ढपली 
चारबैत के प्रमुख कलाकार = खलीफा निहंग खा
                                       करीम निहंग खा 

(3) नौटंकी 

इसका अर्थ = नाटक का अभिनय ।
नामकरण=  9 प्रकार के वाद्य यंत्र होते हैं।
नौटंकी मूलतः=  अवध(U P)
 क्षेत्र = पूर्वी राजस्थान (भरतपुर ,धौलपुर )
इस के प्रवर्तक=  भूरीलाल जी हैं ।
इसके मुख्य कलाकार=  गिरिराज प्रसाद ।
2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया=  रामदयाल( भरतपुर)

 (4)  बहरूपिया कला /स्वांग

 किसी पौराणिक घटना या महापुरुषों की वेशभूषा धारण करना।
 इसके प्रसिद्ध कलाकार या जादूगर = जानकीलाल भांड जिन्हें मंकी मैन भी कहा जाता है ।
यह नाट्य कला भीलवाड़ा में लोकप्रिय हैं ।
न्हार स्वांग = सांगोद ,कोटा
 नाहर स्वांग = मांडल ,भीलवाड़ा 
कालिया डाकी का स्वांग = उदयपुर 

(5) तमाशा 

तमाशा मूलतः = महाराष्ट्र 
तमाशा राजस्थान  में=  जयपुर
इसके प्रवर्तक = बंशीधर भट्ट है।
इसकी शुरुआत सवाई प्रताप सिंह के समय की गई है थी।
जयपुरी ख्याल व द्रुपद गायकी का समन्वय है।

 (6) गवरी /मेरु /राई लोकनाट्य

प्रतीक=  बुढ़िया / पुरिया
क्षेत्र = मेवाड़ क्षेत्र।
शिव भस्मासुर कथा पर आधारित है ।
राजस्थान का सबसे प्राचीन लोकनाट्य हैं 
इसे लोक नाट्य का मेरु  नाट्य भी कहा जाता है।
 भील पुरुषों द्वारा किया जाता है ।

 (7) भवाई लोक नाट्य 

भवाई मूलतः = गुजरात 
राज्य में = मेवाड़ 
भवाई के प्रवर्तक = बाबूजी / नागोजी जाट (केकड़ी ,अजमेर) 
 नाटक = जसमल ओडन 
 इस नाटक की निर्देशक शांता गांधी है ।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध नाटक है।

           (8) प्रमुख ख्याले


शाब्दिक अर्थ = खेल 
सूत्रधार=  हल्कारा।
इसका अर्थ = खेल मनोरंजन के साथ संगीत में कला                    
 {1} कुचामनी  ख्याल=
 क्षेत्र = कुचामन , नागौर 
कुचामनी खेल के प्रवर्तक या संस्थापक = लचीराम है ।
कुचामनी ख्याल के मुख्य कलाकार=  उगमराज हैं ।
कुचामनी ख्याल खुले मंच पर किया जाता है।

 {2}  शेखावटी ख्याल / चिड़ावि ख्याल 
क्षेत्र = चिड़ावा, झुंझुनू ।
शेखावाटी खयाल के प्रवर्तक=  नानूराम है ।
शेखावटी ख्याल के कलाकार = दूलिया राणा है। 

{3} हेला ख्याल
 अर्थ=  लंबी आवाज ।
हेला ख्याल के प्रवर्तक= हेला शायर हैं ।
क्षेत्र में प्रसिद्ध = लालसोट( दौसा) व सवाई माधोपुर ।

 {4} अली बक्शी ख्याल 
क्षेत्र = मुंडावर ,अलवर
 अली बक्षी ख्याल के प्रवर्तक=  अली बख्श हैं।इन्हें अलवर का रसखान भी कहा जाता है ।

{5} किशनगढ़ ख्याल
 छेत्र=  किशनगढ़ (अजमेर )
किशनगढ़ ख्याल के कलाकार=  बंशीधर शर्मा है।

{6} माच की ख्याल
 क्षेत्र = मारवाड़
 माच की ख्याल के कलाकार= बागसूराम है।

{7}  तुर्रा कलंगी ख्याल
 तुर्रा=  शिव को कहा जाता है ।
कलंगी = पार्वती को कहा जाता है।
 मूलतः = चंदेरी( मालवा ) 
राज्य में = मेवाड़
 तुर्रा कलंगी ख्याल के प्रवर्तक = शाहअली , तुकनगिर है।
 हिंदू व मुसलमान दोनों मिलकर इस नाट्यकला को करते हैं।
 इस नाट्य कला के कलाकार जयदयाल जोशी हैं ।
महिलाओं के किरदार स्वयं पुरुष निभाते हैं ।

{8} जयपुरी ख्याल 
क्षेत्र = जयपुर।
 संगीत , काव्य , अभिनय , नृत्य साथ साथ  करते हैं ।
नाटक=  मियां –बीवी
           रसीली तबोलन 
           कान गुजरी 
           जोगी जोगन
 महिलाओं के किरदार महिलाएं स्वयं निभाती है ।

{9} ठप्पाली ख्याल 
क्षेत्र = लक्ष्मणगढ़ (अलवर) 


  (9)  दंगल 

भेट  के दंगल = बसेड़ी( धौलपुर)
 रसिया दंगल = भरतपुर 
कन्हैया दंगल=  करौली

  (10 ) गंधर्व लोकनाट्य 

जैन धर्म इस लोक नाटकों करते हैं।
 क्षेत्र=  मारवाड़ 

   (11) बैठकी लोकनाट्य 

क्षेत्र = पूर्वी राजस्थान

                    राजस्थान मे लीलाएं

(1) राम लीला 
भगवान श्री राम 
क्षेत्र= मारवाड़
 रामलीला के प्रवर्तक = गोस्वामी तुलसीदास है ।
मुख रामलीला=  बिसाऊ (झुंझुनू)
 जनता द्वारा धनुष तोड़ना =अटरू (बारा)

(2) रास लीला
 भगवान श्रीकृष्ण 
क्षेत्र=  (1)कामा (भरतपुर)
         (2) फुलेरा( जयपुर)
 रासलीला के प्रवर्तक=  वल्लभाचार्य हैं।



राजस्थान के लोक नाट्य

राजस्थान के लोक नाट्य pdf


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